रुपया मजबूत! $80 के नीचे फिसले कच्चे तेल के दाम, 46 पैसे चढ़ा;

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
रुपया मजबूत! $80 के नीचे फिसले कच्चे तेल के दाम, 46 पैसे चढ़ा;

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **46** पैसे मजबूत होकर **94.92** पर बंद हुआ। इसका मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट है। फिलहाल बाजार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पॉलिसी नतीजे का इंतजार कर रहा है, जहाँ ब्याज दरें **5.25%** रहने की उम्मीद है। ग्लोबल ऑयल मार्केट के ट्रेंड पर भी सबकी नज़र है, क्योंकि इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर पड़ता है।

कच्चे तेल की नरमी से रुपये को मिली बढ़त

5 अगस्त 2026 को भारतीय रुपया आज मजबूती के साथ खुला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें 46 पैसे की तेजी दर्ज की गई और यह 94.92 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह मजबूती ग्लोबल Brent Crude Oil की कीमतों के $80 प्रति बैरल के नीचे जाने के कारण आई है।

भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। ऐसे में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से देश को विदेशी मुद्रा की कम ज़रूरत पड़ती है। इससे इंपोर्ट बिल घटता है और महंगाई पर भी लगाम लगाने में मदद मिलती है।

RBI की पॉलिसी का इंतजार

बाजार की नजरें अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग पर टिकी हैं, जिसके नतीजे आज आने वाले हैं। ज़्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखेगा। महंगाई को कंट्रोल में रखते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह एक न्यूट्रल स्टैंड की उम्मीद है।

विदेशी निवेश और फॉरेन रिजर्व का सहारा

रुपये को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) से मिले मजबूत निवेश से भी सहारा मिला है, जो जुलाई 2026 में 22 महीने के उच्चतम स्तर पर था। इसके अलावा, जुलाई 2026 के अंत तक भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व $682.4 बिलियन था, जो बाहरी झटकों से निपटने और करेंसी की अस्थिरता को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह भी देखा गया है कि RBI हाल के दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रहा है ताकि करेंसी में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।

आगे क्या हो सकता है?

हालांकि, अभी उम्मीद का माहौल है, लेकिन आने वाले महीनों में कुछ जोखिम भी हैं जिन पर निवेशकों की नजर रहेगी। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव एक बड़ा फैक्टर है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह के टकराव से कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं, जिससे भारत का इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगा और महंगाई दोबारा सिर उठा सकती है। विदेशी निवेश का ट्रेंड ग्लोबल सेंटीमेंट और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी पर भी निर्भर करेगा। आज RBI की ओर से आने वाली कमेंट्री और ग्लोबल एनर्जी मार्केट का रुझान ही रुपये की आगे की दिशा तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.