PM Modi के विदेशी दौरों पर ₹187 करोड़ खर्च, सरकार ने संसद में खोला राज़

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
PM Modi के विदेशी दौरों पर ₹187 करोड़ खर्च, सरकार ने संसद में खोला राज़

संसद से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 के विदेशी दौरों पर करीब **187 करोड़** रुपये खर्च हुए हैं। इनमें से **74.58 करोड़** रुपये जुलाई 2026 तक खर्च हो चुके हैं। सरकार का कहना है कि इन कूटनीतिक यात्राओं से 2021 से अब तक **381 बिलियन** अमेरिकी डॉलर से अधिक का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आया है।

जानिए पूरा खर्च और मायने

राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में 23 देशों की विदेशी यात्राएं कीं, जिन पर लगभग 187 करोड़ रुपये का खर्च आया। इन देशों में अमेरिका, यूके, फ्रांस, चीन और जापान जैसे प्रमुख वैश्विक भागीदार शामिल हैं। वहीं, चालू वर्ष में जुलाई 2026 तक विदेशी यात्राओं पर 74.58 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

क्यों होती हैं ये यात्राएं?

यह खुलासा सांसदों के एक सवाल के जवाब में हुआ, जिन्होंने 2021 से प्रधानमंत्री की यात्राओं पर हुए खर्च का पूरा ब्योरा मांगा था। विदेश राज्य मंत्री, पवित्र मारग्रिटा ने बताया कि उच्च-स्तरीय यात्राएं भारत के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने का एक अहम जरिया हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन यात्राओं का मकसद टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है, साथ ही सप्लाई चेन को मजबूत करना भी एक लक्ष्य है।

आर्थिक फायदा या सिर्फ खर्च?

आर्थिक नजरिए से, सरकार इन यात्राओं को विदेशी पूंजी आकर्षित करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा मानती है। मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) मिला है। इसके अलावा, जुलाई 2021 से अब तक इन यात्राओं के दौरान 316 समझौता ज्ञापनों (MoUs) और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिन्हें सरकार भविष्य की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला मान रही है।

खर्च पर सवाल और सरकार का जवाब

हालांकि, इन खर्चों को लेकर सार्वजनिक और संसदीय चर्चाएं अक्सर उच्च-स्तरीय कूटनीतिक यात्राओं और निवेश, व्यापार समझौतों जैसे ठोस आर्थिक परिणामों के बीच संबंध पर केंद्रित रहती हैं। सरकार का कहना है कि ये यात्राएं अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन खर्च की राशि पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। संसदीय रिकॉर्ड बताते हैं कि 2021 से 2024 के बीच प्रधानमंत्री की विदेशी यात्राओं पर कुल खर्च लगभग 295 करोड़ रुपये रहा, जिसमें यात्राओं की संख्या और प्रकृति के आधार पर सालाना लागत अलग-अलग रही है।

निवेशक और विश्लेषक भारत की कूटनीतिक पहुंच की लागत-लाभ की गतिशीलता को समझने के लिए इन आंकड़ों पर नजर रखते हैं। सरकार स्पष्ट करती है कि रिपोर्ट की गई लागतों में प्रतिनिधिमंडल का आवास, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था जैसे सामान्य खर्च शामिल हैं। जैसे-जैसे ये आंकड़े अंतिम ऑडिट और रिपोर्टिंग के अधीन हैं, जनता के लिए मुख्य निगरानी योग्य बात इन खर्चों में पारदर्शिता और हस्ताक्षरित समझौतों का भारत के व्यापार और निवेश परिदृश्य पर दीर्घकालिक प्रभाव है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.