Retail और Logistics सेक्टर की बढ़ी मुश्किलें, मजदूरी में भारी उछाल से प्रॉफिट पर दबाव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Retail और Logistics सेक्टर की बढ़ी मुश्किलें, मजदूरी में भारी उछाल से प्रॉफिट पर दबाव

देश के 15 राज्यों में न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) बढ़ने से रिटेल और लॉजिस्टिक कंपनियों की लागत में भारी इजाफा हुआ है। कुछ राज्यों में यह बढ़ोतरी **60%** तक है, जिसका सीधा असर Delhivery और Swiggy जैसी बड़ी कंपनियों के मार्जिन पर दिख रहा है।

देश भर में लेबर कॉस्ट बढ़ने से रिटेल और लॉजिस्टिक कंपनियों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है। मई 2026 से लागू हुए इस बदलाव के कारण फेस्टिव सीजन से पहले ही कंपनियां भारी दबाव में हैं। सबसे ज्यादा असर उन राज्यों में देखा जा रहा है जहां औद्योगिक गतिविधियां तेज हैं।

राज्यों के हिसाब से बढ़ी लागत

मजदूरी में बढ़ोतरी का दायरा हर राज्य में अलग है। कर्नाटक में सबसे ज्यादा 60% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे बेंगलुरु में अकुशल कामगारों की मासिक मजदूरी करीब ₹23,376 पहुंच गई है। इसके अलावा, हरियाणा में 35%, पंजाब में 18.4% और तेलंगाना में 9.8% की बढ़ोतरी की गई है। वेयरहाउस और डिलीवरी चेन में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के कारण कंपनियों का पेरोल बिल अचानक से बढ़ गया है।

Q1 FY27 नतीजों पर दिखा असर

कंपनियों के हालिया फाइनेंशियल रिजल्ट्स में इसका असर दिखने लगा है। जून तिमाही में Delhivery ने अपने ग्रॉस मार्जिन में 300 बेसिस पॉइंट की गिरावट दर्ज की है। वहीं, Swiggy के कंट्रीब्यूशन मार्जिन में 20 बेसिस पॉइंट की कमी आई है, जिसका कारण वेयरहाउसिंग की लागत में बढ़ोतरी बताया गया है।

क्यों नहीं बढ़ पा रहे दाम?

कंपनियों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत 'पास-थ्रू' मैकेनिज्म की कमी है। फ्यूल या बिजली की तरह, मजदूरी के खर्च को तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता। ऐसे में कंपनियों को अपना मार्केट शेयर खोने का डर सता रहा है। फिलहाल, कंपनियां ऑपरेशन्स को बेहतर बनाकर और कॉन्ट्रैक्ट्स की दोबारा समीक्षा करके इस दबाव को कम करने की कोशिश कर रही हैं।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

फेस्टिव सीजन के दौरान कंपनियों का मैनेजमेंट किस तरह लागत को मैनेज करता है, यह देखना अहम होगा। क्या कंपनियां अपनी सर्विस की कीमतें बढ़ा पाएंगी या ऑटोमेशन की मदद से खर्च घटाएंगी? इसके अलावा, कानूनी चुनौतियों और सरकारी नोटिफिकेशन पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.