Retail Food Inflation: प्याज के दाम में 3 महीने में **82%** की तूफानी तेजी, रसोई का बजट बिगड़ा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Retail Food Inflation: प्याज के दाम में 3 महीने में **82%** की तूफानी तेजी, रसोई का बजट बिगड़ा

प्याज के भाव में आई **82%** की जबरदस्त बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। दालों, मसालों और कुकिंग ऑयल की बढ़ती कीमतें अब सिर्फ किचन का खर्च ही नहीं, बल्कि बाजार की चाल और भविष्य की मॉनेटरी पॉलिसी के लिए भी बड़ा संकेत हैं।

खाने-पीने की चीजों में आई हालिया तेजी ने आम भारतीय परिवारों के महीने भर के बजट को हिलाकर रख दिया है। जून से सितंबर 2026 के आंकड़ों पर गौर करें तो प्याज का ऑल-इंडिया एवरेज रिटेल प्राइस ₹29.50 प्रति किलो से बढ़कर ₹53.78 प्रति किलो पर पहुंच गया है। यह 82% का इजाफा सीधे तौर पर बाजार में सप्लाई की भारी कमी को दर्शाता है।\n\nसिर्फ प्याज ही नहीं, बाकी रसोई के सामान भी महंगे हो गए हैं। मसालों की बात करें तो हरी इलायची ₹4,400 प्रति किलो और जीरा ₹400 प्रति किलो के स्तर पर बिक रहा है। दालों में अरहर दाल ₹130 और चना दाल ₹100 प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, सरसों तेल और Saffola जैसे ब्रांडेड कुकिंग ऑइल्स में भी 10% से 15% की बढ़ोतरी देखी गई है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?\n\nइन्वेस्टर्स के लिए यह महंगाई दर 'Consumer Price Index' (CPI) के जरिए बहुत अहम है। Reserve Bank of India (RBI) इसी डेटा को देखकर अपनी ब्याज दरों (Interest Rates) का फैसला लेता है। अगर खाने-पीने की महंगाई लगातार बढ़ती रही, तो ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची (higher-for-longer) बनी रह सकती हैं।\n\nदूसरी तरफ, बढ़ती महंगाई का असर कंजम्पशन पैटर्न पर भी पड़ेगा। जब परिवार का बड़ा हिस्सा पैसे सिर्फ जरूरी चीजों पर खर्च करेगा, तो नॉन-एसेंशियल खर्चों में कटौती होगी। इसका सीधा असर FMCG कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है, क्योंकि वे बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाएंगी। फिलहाल, मार्केट सरकार की तरफ से एक्सपोर्ट बैन या स्टॉक लिमिट जैसे सख्त कदमों पर नजरें गड़ाए बैठा है।

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