Reliance Industries ने फाइनेंशियल ईयर 27 की दूसरी तिमाही में **33.8%** की उछाल के साथ **₹29,550 करोड़** का रिकॉर्ड प्रॉफिट दर्ज किया है। शानदार नतीजों के बावजूद कंपनी इस समय एलन मस्क के साथ रेगुलेटरी विवाद और अमेरिका के साथ बढ़ती एनर्जी पार्टनरशिप को लेकर चर्चा में है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का दम
Reliance Industries Ltd (RIL) ने Q2 में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए बाजार की उम्मीदों को पार कर लिया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 27.8% बढ़कर ₹3,62,268 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि EBITDA ने ₹62,409 करोड़ का रिकॉर्ड आंकड़ा छुआ है। O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स) सेगमेंट में सुधार कंपनी की ऑपरेशनल मजबूती को दर्शाता है।
मस्क के साथ तनातनी और रेगुलेटरी पेंच
कंपनी का शानदार मुनाफा अपनी जगह है, लेकिन मार्केट में चर्चा का दूसरा केंद्र एलन मस्क के साथ जारी विवाद है। मस्क ने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस में रेगुलेटरी देरी को लेकर रिलायंस पर सवाल उठाए हैं। वहीं, रिलायंस का कहना है कि वे किसी भी प्रतिस्पर्धा से नहीं डरते और उनके प्रोजेक्ट्स भी वही कानूनी प्रक्रिया अपना रहे हैं, जो अन्य कंपनियों के लिए अनिवार्य है।
अमेरिका के साथ बढ़ती एनर्जी पार्टनरशिप
एक तरफ जहां सैटेलाइट डिबेट गर्म है, वहीं दूसरी तरफ जामनगर रिफाइनरी को लेकर वाशिंगटन का रुख काफी सकारात्मक है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का जामनगर दौरा यह साबित करता है कि रिलायंस की इंफ्रास्ट्रक्चर पावर अमेरिका के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। यह रिफाइनरी 216 से ज्यादा ग्रेड के क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम है, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में रिलायंस की धाक जमाती है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
भले ही आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को कुछ बड़े रिस्क पर नजर रखनी होगी। O2C सेगमेंट कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील है। इसके अलावा, कंपनी का ₹1.5 लाख करोड़ का न्यू एनर्जी निवेश (ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग) एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके लॉन्ग-टर्म एग्जीक्यूशन और मार्केट रिस्पॉन्स पर सबकी नजरें टिकी होंगी।
