RBI के पूर्व गवर्नर C. Rangarajan ने GST काउंसिल से मांग की है कि **₹2,000** से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाली फीस को टैक्स से मुक्त रखा जाए। **15 अक्टूबर, 2026** से लागू होने वाले **0.4%** MDR चार्ज को लेकर छोटे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर C. Rangarajan ने GST काउंसिल से एक अहम अपील की है। उन्होंने कहा है कि ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को GST के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। यह सलाह 15 अक्टूबर, 2026 को होने वाले बदलावों से ठीक पहले आई है, जहां चुनिंदा UPI भुगतानों पर 0.4% का MDR लागू किया जाएगा।
क्यों है राहत की जरूरत?
Rangarajan का तर्क है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के मेंटेनेंस के लिए चार्ज लेना तो समझ में आता है, लेकिन उस फीस पर 18% का GST लगाना व्यापारियों के लिए बोझ बन जाएगा। इससे डिजिटल पेमेंट को अपनाने की रफ्तार धीमी हो सकती है।
वर्तमान नियमों के तहत, ₹2,000 तक के पेमेंट और P2PM फ्रेमवर्क (जहां QR कोड से ₹1 लाख प्रति माह तक का कलेक्शन होता है) पर कोई फीस नहीं है। लेकिन बड़ी ट्रांजैक्शंस पर लगने वाला 0.4% शुल्क अब बिजनेस की कॉस्ट बढ़ा देगा।
व्यापारियों के सामने बड़ी चुनौती
कई छोटे और अनरजिस्टर्ड व्यापारी इन ट्रांजैक्शन फीस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं उठा सकते। इसका मतलब है कि यह टैक्स सीधे उनके नेट मार्जिन को कम करेगा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि बड़ी संख्या में व्यापारी इस 0.4% MDR का भार खुद उठाने को तैयार नहीं हैं। खतरा यह है कि दुकानदार या तो ग्राहकों से यह चार्ज वसूलेंगे या फिर वापस कैश (Cash) लेने पर मजबूर हो जाएंगे, जिससे डिजिटल इंडिया मिशन को झटका लग सकता है।
तैयारी और आगे का रास्ता
दुकानदारों को अक्टूबर की डेडलाइन से पहले अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट करना होगा। BSE के MD और CEO Sundararaman Ramamurthy ने भी इस बात पर जोर दिया है कि UPI ने वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया है, जिसे बनाए रखना जरूरी है। अब सबकी निगाहें GST काउंसिल की अगली बैठक पर हैं कि क्या व्यापारियों को इस टैक्स से राहत मिलेगी या उन्हें नए नियमों के अनुसार अपना काम ढालना होगा।
