IPRD 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी चेतावनी, सप्लाई चेन को सुरक्षित करना अब जरूरी

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AuthorMehul Desai|Published at:
IPRD 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी चेतावनी, सप्लाई चेन को सुरक्षित करना अब जरूरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में 'इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग' (IPRD) 2026 के दौरान समुद्री सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने ट्रेड रूट्स के हथियार बनने के बढ़ते खतरे और ग्लोबल कॉमर्स की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) 2026 को संबोधित करते हुए समुद्री अस्थिरता से निपटने के लिए सप्लाई चेन में बदलाव की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्लोबल ट्रेड रूट्स अब deliberate disruptions और 'हथियार' के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के खतरे का सामना कर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।

3 से 5 नवंबर तक चले इस कार्यक्रम का मुख्य विषय 'इंडो-पैसिफिक में विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग' था। मंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी एक ही व्यापार मार्ग पर निर्भरता अब एक बड़ा रिस्क बन चुकी है। निवेशकों के लिए यह संदेश साफ है—भारत सरकार का पूरा फोकस अब रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूत करने पर है।

टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय समानता पर फोकस

पारंपरिक सुरक्षा से आगे बढ़ते हुए, राजनाथ सिंह ने साइबर अटैक और अवैध तस्करी जैसे गैर-पारंपरिक खतरों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI, ऑटोनॉमस सिस्टम और सेंसर टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल सुरक्षा चुनौतियों के लिए होना चाहिए, न कि नई निर्भरता पैदा करने के लिए। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि अगर टेक्नोलॉजी का लाभ केवल कुछ ही देशों तक सीमित रहा, तो पूरा क्षेत्र भविष्य के संकटों के लिए तैयार नहीं हो पाएगा। भारत अब नॉलेज-शेयरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर अधिक ध्यान दे रहा है, जो स्थानीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

निवेशकों के लिए स्ट्रैटेजिक संकेत

सरकार का यह रुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, शिपबिल्डिंग और मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियों के लिए सकारात्मक है। जैसे-जैसे देश इंडो-पैसिफिक में अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने की दिशा में बढ़ रहा है, सेंसर टेक्नोलॉजी, कोस्टल सर्विलांस और उन्नत नौसैनिक प्रणालियों में सरकारी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। जो कंपनियां 'डुअल-यूज़' यानी मिलिट्री और सिविलियन दोनों क्षेत्रों में काम कर रही हैं, उन पर निवेशकों की नजर बनी रहनी चाहिए, क्योंकि भविष्य के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में इन्हें प्राथमिकता मिल सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.