RBI Rate Hike: रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाकर किया **5.5%**, राजीव कुमार ने निजी निवेश पर जताई चिंता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI Rate Hike: रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाकर किया **5.5%**, राजीव कुमार ने निजी निवेश पर जताई चिंता

रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट** की बढ़ोतरी करते हुए इसे **5.5%** कर दिया है। इस पर पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने चेतावनी दी है कि भारत की विकास दर के लिए सरकारी खर्च के बजाय प्राइवेट सेक्टर का निवेश जरूरी है, लेकिन बढ़ती ब्याज दरें छोटी कंपनियों की राह मुश्किल कर सकती हैं।

रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के साथ इसे 5.50% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का यह कदम बढ़ती महंगाई और ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच आया है। इस फैसले के बाद पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने अर्थव्यवस्था के सामने खड़े एक बड़े जोखिम की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने फाइनेंशियल ईयर में ₹12.2 लाख करोड़ का भारी-भरकम पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) लक्ष्य रखा है, लेकिन बढ़ती ब्याज दरों का सीधा असर प्राइवेट सेक्टर के कर्ज पर पड़ रहा है।

सरकार को बदलना होगा नजरिया

राजीव कुमार का मानना है कि भारत को डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल करने के लिए अपनी भूमिका 'रेगुलेटरी' से बदलकर 'प्रमोशनल' करनी होगी। इसका मतलब है कि सरकार को केवल नियम-कायदों तक सीमित न रहकर निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल ही वह चाबी है, जिससे निवेश की अड़चनों को दूर किया जा सकता है।

'K-शेप्ड' रिकवरी का खतरा

महंगी ब्याज दरों के कारण अर्थव्यवस्था में एक असमान रिकवरी या 'K-शेप्ड' ट्रेंड का खतरा मंडरा रहा है। जहां बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां इस अतिरिक्त कर्ज लागत को आसानी से झेल पा रही हैं, वहीं स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) के लिए विस्तार करना और वर्किंग कैपिटल जुटाना कठिन होता जा रहा है। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो RBI के 7.1% के GDP ग्रोथ अनुमान को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

FY27 के लिए प्राइवेट सेक्टर का Capex ₹3.2 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो सुधार तो दिखा रहा है, लेकिन इसे और तेजी की दरकार है। आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों के मार्जिन और बैंक क्रेडिट ऑफटेक के आंकड़ों पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि महंगी दरों के कारण कर्ज पर निर्भर रहने वाली कंपनियों का मुनाफा दबाव में आ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.