केरल बीजेपी अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar ने राज्य के बढ़ते कर्ज और अटके इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि केंद्र की नीतियों के साथ तालमेल की कमी राज्य के निवेश माहौल और पॉलिसी प्रेडिक्टेबिलिटी के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
फिस्कल चुनौतियां और बिजनेस पर असर
केरल बीजेपी नेता Rajeev Chandrasekhar ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए बढ़ते कर्ज और सुस्त निवेश माहौल को बड़ी चुनौती बताया है। निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि राज्य की फिस्कल हेल्थ सीधे तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, यूटिलिटीज और एजुकेशन पर होने वाले खर्च को प्रभावित करती है।
Chandrasekhar का तर्क है कि पुराने पड़ चुके इकोनॉमिक मॉडल और भारी कर्ज के कारण प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर बुरा असर पड़ा है, जिससे राज्य से टैलेंट का पलायन भी बढ़ा है। अगर GSDP के मुकाबले कर्ज का अनुपात इसी तरह बढ़ता रहा, तो भविष्य में राज्य के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट सेक्टर को साथ लाना काफी मुश्किल हो जाएगा।
केंद्र-राज्य नीतिगत टकराव
PM SHRI जैसी महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में राज्य सरकार की उदासीनता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। जब राज्य केंद्र की योजनाओं से दूरी बनाते हैं, तो इससे इंफ्रास्ट्रक्चर मॉर्डनाइजेशन का मौका हाथ से निकल जाता है, जिसका सीधा असर राज्य की ह्यूमन कैपिटल पर पड़ता है। ऐसी नीतिगत अनिश्चितता किसी भी बिजनेस के लिए निवेश करने से पहले एक बड़ा रेड फ्लैग साबित होती है।
डिजिटल पेमेंट्स और UPI पर स्टैंड
राज्यों के मुद्दों से इतर, Rajeev Chandrasekhar ने देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की मजबूती का भी बचाव किया। UPI ट्रांजेक्शन पर MDR (Merchant Discount Rate) को लेकर विपक्ष के दावों को उन्होंने भ्रामक बताया और कहा कि डिजिटल पेमेंट्स की सफलता एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या केरल सरकार फिस्कल अनुशासन और केंद्रीय योजनाओं के साथ तालमेल बिठाकर राज्य में एक प्रतिस्पर्धी और इन्वेस्टर-फ्रेंडली माहौल बना पाती है या नहीं।
