पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की सेमीकंडक्टर पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजन ने लागत और तस्करी जैसे जोखिमों पर चिंता जताई है, जबकि सरकार ने **₹1.27 लाख करोड़** के 'सेमीकॉन 2.0' स्कीम को देश की रणनीतिक जरूरत बताया है।
पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने हालिया इंटरव्यू में भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग मिशन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चिपसेट को ऐसी वस्तु बताया है जिसे आसानी से तस्करी किया जा सकता है और सरकारी खर्च पर चिंता जताई है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और सरकार ने इस रुख का कड़ा विरोध किया है।\n\n### इंडस्ट्री का रुख और सरकारी निवेश\n\nजानकारों का मानना है कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए अनिवार्य है। ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने के लिए 'मेक इन इंडिया' के तहत सरकार ने अब तक 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। जुलाई 2026 तक Micron, Kaynes Semicon और CG Semi जैसी कंपनियां कमर्शियल ऑपरेशंस की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं।\n\n### सेमीकॉन 2.0 की अहमियत\n\nकैबिनेट ने हाल ही में ₹1,27,500 करोड़ के बजट के साथ 'सेमीकॉन 2.0' स्कीम को मंजूरी दी है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल सब्सिडी नहीं, बल्कि एक लंबे समय का निवेश है जो भारत को AI और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाएगा।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\n\nयह बहस आर्थिक विचारधाराओं के टकराव को दिखाती है—एक तरफ शॉर्ट-टर्म फिस्कल एफिशिएंसी है और दूसरी तरफ लॉन्ग-टर्म औद्योगिक क्षमता। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि नीतियां कितनी स्थिर रहती हैं। अब सबकी नजरें 17-19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 'सेमीकॉन इंडिया 2026' कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां इन 12 प्रोजेक्ट्स के प्रोडक्शन माइलस्टोन पर नई जानकारी मिल सकती है।
