Rupee Depreciation: रुपये को बचाने के लिए फॉरेक्स रिजर्व खर्च न करे RBI, रघुराम राजन ने दी चेतावनी

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Rupee Depreciation: रुपये को बचाने के लिए फॉरेक्स रिजर्व खर्च न करे RBI, रघुराम राजन ने दी चेतावनी

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने रुपये की गिरती कीमत को संभालने के लिए फॉरेक्स रिजर्व के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। इस साल रुपया **6%** तक टूट चुका है, ऐसे में राजन ने सुझाव दिया है कि रुपये को थोड़ा डेप्रिसिएट होने देना एक्सपोर्ट के लिए फायदेमंद हो सकता है।

रघुराम राजन ने साफ कहा है कि अगर केंद्रीय बैंक रुपये के बचाव में लगातार फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल करता है, तो यह एक रणनीतिक भूल साबित हो सकती है। इस साल भारतीय मुद्रा में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई है और सवाल यह है कि क्या बाजार की ताकतों को अपना काम करने देना चाहिए या बैंक को दखल देना चाहिए।

रिजर्व का गणित और जोखिम

RBI ने इस साल बैंकिंग लिक्विडिटी और रुपये को थामने के लिए विशेष उपायों के जरिए जुटाए गए $140 बिलियन के फंड का लगभग आधा हिस्सा पहले ही खर्च कर दिया है। राजन का मानना है कि ग्लोबल इकोनॉमी में बदलाव के इस दौर में रिजर्व का इस तरह इस्तेमाल करना भविष्य के लिए घातक हो सकता है।

क्या है राजन का सुझाव?

राजन के अनुसार, रुपये में थोड़ी गिरावट (Depreciation) को स्वीकार करना एक 'शॉक एब्जॉर्बर' की तरह काम कर सकता है। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल मार्केट में ज्यादा कॉम्पिटिटिव होने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू भी है—रुपया कमजोर होने से क्रूड ऑयल और इंडस्ट्रियल रॉ मटीरियल जैसे इम्पोर्ट महंगे हो जाएंगे, जिससे देश में इंपोर्टेड इन्फ्लेशन का खतरा बढ़ सकता है।

ग्लोबल चुनौतियां

मौजूदा समय में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता बड़े सिरदर्द बने हुए हैं। अगर संघर्ष बढ़ता है और ऑयल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ेगा। इन्वेस्टर्स को अब RBI की अगली पॉलिसी मीटिंग और उनके रुख पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसी से तय होगा कि आगे चलकर मार्केट में कितनी वोलैटिलिटी देखने को मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.