RBI का बड़ा कदम: जून में की फॉरेक्स की नेट खरीद, लगातार बिकवाली के बाद पलटा पासा!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI का बड़ा कदम: जून में की फॉरेक्स की नेट खरीद, लगातार बिकवाली के बाद पलटा पासा!

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जून 2026 में **$561 मिलियन** की शुद्ध फॉरेन करेंसी खरीदी है। यह पिछले दो महीनों की भारी बिकवाली के ट्रेंड को तोड़ता है। यह बदलाव इस ओर इशारा करता है कि RBI अब भारतीय रुपये को सपोर्ट करने के लिए आक्रामक बिकवाली बंद कर रहा है, जो वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच मुद्रा बाजारों में स्थिरता का संकेत है।

RBI की बदली रणनीति: अब डॉलर खरीद रहा है, बेच नहीं रहा!

विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की भूमिका में बड़ा बदलाव आया है। जून 2026 में, केंद्रीय बैंक शुद्ध खरीदार बनकर उभरा है, जिसने $561 मिलियन की फॉरेन करेंसी खरीदी। यह अप्रैल और मई में की गई भारी बिकवाली के ठीक विपरीत है, जब RBI ने भारतीय रुपये को संभालने के लिए $8.9 बिलियन (अप्रैल) और $6.1 बिलियन (मई) बेचे थे।

रुपये पर दबाव और RBI का एक्शन

साल की शुरुआत में, रुपये पर काफी दबाव था और यह मई 2026 में 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इस स्थिति से निपटने के लिए RBI ने अपने रिजर्व से डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को रोकने की कोशिश की थी। जून में, RBI ने $30.89 बिलियन की कुल खरीद और $30.33 बिलियन की कुल बिक्री की, जो एक संतुलित हस्तक्षेप रणनीति का संकेत देता है।

स्थिर रुपये का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

एक स्थिर मुद्रा भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए बेहद जरूरी है। जब केंद्रीय बैंक आक्रामक बिकवाली बंद करता है, तो यह माना जाता है कि मुद्रा बाजार की अस्थिरता कम हो गई है। एक स्थिर रुपया इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (आयातित महंगाई) को नियंत्रित करने में मदद करता है, जो उन भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद है जो डॉलर में कच्चा माल खरीदती हैं। इसके अलावा, कम मुद्रा अस्थिरता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए एक अधिक अनुमानित माहौल बनाती है।

फॉरवर्ड डॉलर बुक में भी कमी

निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण संकेत RBI की फॉरवर्ड डॉलर बुक है, जिसमें भविष्य के विदेशी मुद्रा अनुबंध शामिल होते हैं। जून के अंत तक, फॉरवर्ड डॉलर की नेट बिक्री घटकर $103.3 बिलियन रह गई, जो मई के अंत में $106.7 बिलियन थी। यह कमी दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक मुद्रा को सहारा देने के लिए अपनी पिछली प्रतिबद्धताओं को धीरे-धीरे कम कर रहा है।

आगे की चुनौतियां और जोखिम

इन संकेतों के बावजूद, कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। वैश्विक व्यापार नीतियों में अनिश्चितता और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर के लिए भारत के चालू खाता घाटे (current account deficit) के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव भी वैश्विक तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है और रुपये पर फिर से दबाव डाल सकता है।

बाजार की नजरें RBI पर

आगे चलकर, बाजार की मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि RBI घरेलू लिक्विडिटी और महंगाई की उम्मीदों को प्रबंधित करते हुए मुद्रा को स्थिर रखने के अपने लक्ष्य को कैसे संतुलित करता है। निवेशक संभवतः भारतीय रुपये के स्वास्थ्य और स्थिरता का आकलन करने के लिए RBI के विदेशी मुद्रा भंडार डेटा और उसकी फॉरवर्ड मार्केट पोजीशन पर नजर बनाए रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.