Reserve Bank of India ने एक रिसर्च में सुझाव दिया है कि सैटेलाइट नाइट-टाइम लाइट्स और Google Trends का इस्तेमाल कर राज्यों की तिमाही आर्थिक गतिविधियों का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। यह मॉडल सरकारी आंकड़ों में आने वाली **12 से 18 महीने** की देरी को खत्म करने में मदद करेगा।
क्या है RBI का 'Nowcasting' मॉडल?
RBI के अक्टूबर 2026 के बुलेटिन में छपी इस रिसर्च का नाम 'Nowcasting State-Level Economic Activity in India' है। अभी भारत में Gross State Value Added (GSVA) के आंकड़े आने में 12 से 18 महीने की देरी होती है, जिससे पॉलिसी मेकर्स के लिए वर्तमान आर्थिक स्थिति को समझना मुश्किल हो जाता है। इस रिसर्च के लेखकों - बिपुल घोष, नरेंद्र सिंह और संध्या कुरुगंती ने एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया है जो रीयल-टाइम डेटा का उपयोग करके वर्तमान आर्थिक संकेतकों का अनुमान लगा सकता है।
कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी?
रिसर्च में दो मुख्य डेटा सोर्सेज का इस्तेमाल किया गया है:
- NASA का 'Black Marble' डेटा: इसके जरिए रात के समय की रोशनी (Night-time light intensity) मापी जाती है। तर्क यह है कि जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधियां और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ता है, बिजली की खपत और रोशनी भी बढ़ती है।
- Google Trends: इसमें फाइनेंस, जॉब्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स में इंटरनेट सर्च की तीव्रता को ट्रैक किया गया है।
राज्यों पर क्या रहा असर?
गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर पायलट टेस्ट के दौरान शानदार परिणाम मिले। पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस नए मॉडल ने अनुमान की गलतियों (RMSE) को काफी कम किया:
- गुजरात: 62% तक सुधार
- कर्नाटक: 54% तक सुधार
- महाराष्ट्र: 38% तक सुधार
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि यह तरीका आर्थिक निगरानी के लिए बहुत कारगर लग रहा है, लेकिन लेखकों ने स्पष्ट किया है कि ये उनके निजी विचार हैं, RBI का आधिकारिक स्टैंड नहीं। इसके अलावा, ऊर्जा दक्षता (energy efficiency) में सुधार के कारण कभी-कभी रोशनी और आर्थिक आउटपुट का तालमेल बिगड़ सकता है। यह फिलहाल एक एक्सपेरिमेंटल मॉडल है और इसे पूरे देश के राज्यों पर लागू करने के लिए अभी और परीक्षणों की आवश्यकता होगी।
