अगले महीने होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से रेपो रेट में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है। ज्यादातर अर्थशास्त्री मानते हैं कि RBI फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखेगा। हालांकि, 2027 फाइनेंशियल ईयर तक दरों में क्या उतार-चढ़ाव होंगे, इस पर जानकारों की राय बंटी हुई है। ऐसे में, निवेशक गवर्नर की महंगाई (Inflation) और ग्रोथ (Growth) पर टिप्पणी का बेसब्री से इंतजार करेंगे।
जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
आगामी अगस्त मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपनी बेंचमार्क रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने की पूरी उम्मीद है। यह उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि केंद्रीय बैंक एक तरफ जहां आर्थिक विकास को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई को काबू में रखना भी उसकी प्राथमिकता है। बाजार के लिए, इस फैसले को मौजूदा पॉलिसी स्थिरता के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि, अल्पावधि के बाद का परिदृश्य विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
FY27 का रास्ता अनिश्चित
जहां तत्काल दर निर्णय तय लग रहा है, वहीं 2027 फाइनेंशियल ईयर का रास्ता अभी भी अनिश्चित है। अर्थशास्त्रियों के हालिया सर्वे में भविष्य में दरों में होने वाले बदलावों को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। सर्वे में शामिल 40% अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI पूरे साल दरों को स्थिर रखेगा, जबकि बाकी 60% एक या दो बार दरें बढ़ाने की संभावना जता रहे हैं। जो जानकार दरें बढ़ने की बात कह रहे हैं, उनमें भी आम सहमति यह है कि ऐसा अक्टूबर से पहले होने की संभावना नहीं है। इससे पता चलता है कि केंद्रीय बैंक डेटा पर निर्भर रहने की रणनीति अपनाएगा।
ग्रोथ और महंगाई पर RBI का रुख
बाजारों के लिए ग्रोथ (Growth) और महंगाई (Inflation) के अनुमानों पर केंद्रीय बैंक का रुख एक अहम पैमाना होगा। ज्यादातर विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि RBI अपने मौजूदा अनुमानों पर कायम रहेगा, जिसमें जीडीपी ग्रोथ 6.6% और सीपीआई महंगाई 5.1% रहने का अनुमान है। इन आंकड़ों में किसी भी तरह का बदलाव - जैसे ग्रोथ में बढ़ोतरी या महंगाई के लक्ष्यों में कमी - RBI के अर्थव्यवस्था की मजबूती के प्रति विश्वास को दर्शाएगा।
गवर्नर की टिप्पणी का महत्व
चूंकि ब्याज दर में कोई बदलाव की उम्मीद कम है, इसलिए बाजार की भावना पर सबसे बड़ा प्रभाव गवर्नर की आधिकारिक टिप्पणी से पड़ने की संभावना है। ज्यादातर पर्यवेक्षक एक तटस्थ, 'प्रतीक्षा करो और देखो' वाले रवैये की उम्मीद कर रहे हैं। इसका मतलब है कि RBI किसी भी निश्चित नीतिगत बदलाव से पहले विदेशी मुद्रा प्रवाह (Forex Inflows) और वैश्विक बाजार की स्थिरता पर आने वाले आंकड़ों पर नजर रखना चाहेगा। एक संतुलित बयान आम तौर पर यह संकेत देगा कि बैंक अपनी मौजूदा रणनीति बदलने की जल्दबाजी में नहीं है।
लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर भी नजर
लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि अगस्त सत्र में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। अधिकांश अर्थशास्त्री मौजूदा लिक्विडिटी ढांचे के जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें RBI बैंकिंग प्रणाली में किसी भी अप्रत्याशित अस्थिरता से निपटने के लिए अपने लचीले उपकरणों का उपयोग करता रहेगा। निवेशक महंगाई लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता और फाइनेंशियल ईयर के आगे बढ़ने के साथ घरेलू लिक्विडिटी के प्रबंधन के लिए RBI की विकसित हो रही रणनीति पर लगातार नजर रखेंगे।
