Reserve Bank of India (RBI) ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे यह अब **5.50%** पर पहुंच गया है। फरवरी 2023 के बाद पहली बार हुई इस सख्ती के चलते बुधवार को बाजार में बिकवाली देखी गई और Sensex-Nifty लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में मची हलचल
केंद्रीय बैंक के इस फैसले के बाद से भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव है। बुधवार को कारोबार के अंत में BSE Sensex 429 अंक गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 173 अंकों की गिरावट रही और यह 22,603.05 पर थमा। यह फैसला 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) की ओर इशारा करता है, जो निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण है।
गवर्नर का रुख और महंगाई
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल बैंक का पूरा जोर महंगाई को काबू में रखने पर है। भले ही RBI ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, लेकिन महंगाई दर 5.2% पर बने रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में भी ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं, जो कंपनियों और आम लोगों के लिए लोन को महंगा बनाए रखेगा।
सेक्टरवार असर
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर ऑटो, रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर पर पड़ा है। निवेशकों को डर है कि महंगा लोन लेने के कारण गाड़ियों और घरों की मांग में कमी आ सकती है। हालांकि, PSU बैंकों के शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का सेंटीमेंट काफी सतर्क बना हुआ है।
बाहरी दबाव और रुपया
बाजार पर केवल डोमेस्टिक पॉलिसी का ही नहीं, बल्कि बाहरी दबाव भी है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 96.78 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पांच महीने का निचला स्तर है। वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें $101 प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश पर आयातित महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
अब बाजार की नजरें आने वाले समय में आने वाले इन्फ्लेशन डेटा पर टिकी हैं। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां बढ़ते इंटरेस्ट खर्च और कच्चे माल की लागत के बीच अपने मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं।
