RBI की बड़ी पहल: फॉरेक्स मार्केट होगा ज़्यादा फ्लेक्सिबल, ग्लोबल झटकों से निपटने की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI की बड़ी पहल: फॉरेक्स मार्केट होगा ज़्यादा फ्लेक्सिबल, ग्लोबल झटकों से निपटने की तैयारी

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) देश के फॉरेक्स मार्केट को ग्लोबल आर्थिक झटकों से बचाने के लिए इसमें बड़े बदलाव लाने की तैयारी में है। RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने FEDAI के सालाना कार्यक्रम में कहा कि मार्केट को ज़्यादा फ्लेक्सिबल और असरदार बनाने की ज़रूरत है, ताकि रिटेल फॉरेक्स यूज़र्स को बेहतर सर्विस मिले और कंपनियों के लिए लागत कम हो।

फॉरेक्स मार्केट में क्यों हो रहा है बदलाव?

RBI का मानना है कि भारत को अपनी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ बनाए रखने के लिए फॉरेक्स मार्केट के मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाना होगा। अभी भारतीय फॉरेक्स मार्केट में रोज़ाना करीब $80 बिलियन का कारोबार होता है, लेकिन RBI का मानना है कि इसे और बेहतर बनाया जा सकता है। बैंक अब सिर्फ रेगुलेशन करने के बजाय, सर्विसेज को तेज़, पारदर्शी और सभी के लिए आसान बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं।

रिटेल यूज़र्स और छोटे कारोबारियों पर असर

RBI ने बैंकों द्वारा रिटेल ग्राहकों से लिए जाने वाले चार्ज और डॉक्यूमेंटेशन में असमानताओं पर भी ध्यान दिया है। इन कमियों की वजह से छोटे कारोबारियों को करेंसी के रिस्क को मैनेज करने में परेशानी होती है। अब RBI ऐसी स्टैंडर्ड प्रैक्टिसेस को बढ़ावा देगा, जिससे छोटे बिज़नेस भी बिना ज़्यादा परेशानी या खर्च के करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकें।

भारतीय रुपये को ग्लोबल ट्रेड में बढ़ावा

RBI की एक बड़ी स्ट्रेटेजी है कि इंटरनेशनल ट्रेड में भारतीय रुपये (INR) का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। इसके लिए स्पेशल Rupee Vostro Account (SRVA) फ्रेमवर्क को बढ़ावा दिया जा रहा है। RBI का लक्ष्य है कि डोमिनेंट इंटरनेशनल करेंसी पर निर्भरता कम हो, जिससे विदेशी ट्रांजैक्शंस की एफिशिएंसी बढ़े और भारतीय कंपनियों के लिए लागत कम हो।

बैंक-आधारित मॉडल की चुनौतियां

डिप्टी गवर्नर ने यह भी बताया कि भारतीय मार्केट काफी हद तक बैंकों पर निर्भर है। हालांकि, भविष्य में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के बड़े पैमाने को देखते हुए, सिर्फ बैंक-आधारित मॉडल काफी नहीं होगा। RBI चाहता है कि मार्केट-मेकर बेस को बढ़ाया जाए और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके मार्केट की गहराई और पार्टिसिपेशन को बढ़ाया जाए।

RBI यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स के पास मज़बूत रिस्क मैनेजमेंट प्रैक्टिसेस हों। जैसे-जैसे भारतीय मार्केट ग्लोबल लिक्विडिटी के साथ इंटीग्रेट हो रहा है, RBI डोमेस्टिक और ऑफशोर मार्केट्स के बीच किसी भी असामान्य प्राइस डिफरेंस पर कड़ी नज़र रख रहा है। निवेशकों को रिटेल फॉरेक्स में पारदर्शिता लाने वाले रेगुलेटरी अपडेट्स और डेरिवेटिव मार्केट्स में पब्लिक सेक्टर बैंकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्ट्रक्चरल बदलावों पर नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.