RBI ने नहीं बदला रेपो रेट; क्रूड ऑयल सस्ता होने से बाज़ार में आई तेज़ी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI ने नहीं बदला रेपो रेट; क्रूड ऑयल सस्ता होने से बाज़ार में आई तेज़ी

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करते हुए रेपो रेट को **5.25%** पर बरकरार रखा है। केंद्रीय बैंक ने न्यूट्रल स्टैंड बनाए रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में गिरावट ने भी भारतीय शेयर बाज़ारों को सहारा दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों में तेज़ी देखी गई।

RBI का बड़ा फैसला और बाज़ार की प्रतिक्रिया

भारतीय शेयर बाज़ारों में गुरुवार को सकारात्मक चाल देखी गई। निवेशक भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उस फैसले को पचा रहे थे, जिसमें रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा गया है। केंद्रीय बैंक का यह न्यूट्रल रुख पॉलिसी में स्थिरता का संकेत देता है, जो अनिश्चितता के दौर के बाद कई बाज़ार प्रतिभागियों को उम्मीद थी। इस फैसले के साथ ही, RBI ने वितीय वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

वैश्विक कारकों का असर और महंगाई का दबाव

बाज़ार के सकारात्मक माहौल में वैश्विक ऊर्जा लागत में आई गिरावट का भी बड़ा योगदान रहा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $80 प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यह भारत के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे आयातित तेल की लागत कम होगी और देश के व्यापार घाटे पर दबाव भी कम होगा। कम तेल की कीमतें आमतौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी मानी जाती हैं, क्योंकि ये परिवहन और उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं।

हालांकि, निवेशक घरेलू महंगाई पर भी नज़र बनाए हुए हैं। ग्रोथ की उम्मीदें भले ही मजबूत दिख रही हों, लेकिन जून 2026 में खुदरा महंगाई 17 महीनों में पहली बार 4% के लक्ष्य को पार कर गई थी। यह आंकड़ा अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% से 6% के सहिष्णुता बैंड में है, लेकिन अगर ऊर्जा या कमोडिटी की लागत में और वृद्धि होती है, तो यह उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। इससे भविष्य की मीटिंग्स में RBI को अपना मौजूदा न्यूट्रल रुख बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है। इसलिए, आने वाले महंगाई के आंकड़े बाज़ार के लिए एक महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बने रहेंगे।

बाज़ार का प्रदर्शन और निवेशक भावना

इस घोषणा के बाद, Sensex और Nifty जैसे प्रमुख सूचकांकों में तेज़ी देखी गई, और इंडिया VIX (मार्केट वोलैटिलिटी इंडेक्स) में भी गिरावट आई। यह दर्शाता है कि ब्याज दरों में ठहराव की उम्मीद बाज़ार को रास आई है। हालांकि, सेक्टोरल प्रदर्शन में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) और फार्मा जैसे सेक्टर्स में निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई, जबकि हालिया तेज़ी के बाद पोर्टफोलियो एडजस्ट करने वाले अन्य क्षेत्रों में मिली-जुली चाल देखने को मिली।

आगे की राह देखें तो, बाज़ार प्रतिभागी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के प्रवाह पर करीब से नज़र रख रहे हैं। हालांकि ये निवेशक हाल ही में बाज़ार में लौटे हैं, लेकिन उनकी निरंतर भागीदारी की गारंटी नहीं है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स का ऊंचा स्तर एक बड़ा जोखिम बना हुआ है, क्योंकि विदेश में सुरक्षित संपत्तियों पर अधिक रिटर्न कभी-कभी भारत जैसे उभरते बाज़ारों से पूंजी खींच सकता है। इसलिए, घरेलू ग्रोथ की मजबूती, महंगाई का प्रबंधन और वैश्विक ब्याज दरों के रुझान आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.