ग्लोबल मार्केट में बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों के चलते दुनिया भर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की राह पर चलते हुए अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला ले सकता है।
ग्लोबल असर और भारतीय बाजार
महंगाई एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिसकी मुख्य वजह क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें हैं। अमेरिका के Federal Reserve और जापान के Bank of Japan ने पहले ही 'इजी-मनी' पॉलिसी से दूरी बना ली है, जिसका असर अब भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। देश में महंगाई को काबू में रखने के लिए RBI के पास ब्याज दरें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं दिख रहा है। बैंक सिस्टम से अतिरिक्त लिक्विडिटी कम करने के लिए पहले से ही बॉन्ड की बिक्री कर रहा है।
निवेशकों की चिंता और मार्केट पर असर
इस बदलाव का सीधा असर बाजार की चाल पर होगा। भारत में 10-year government bond yield पहले ही 7% के स्तर को पार कर चुका है। जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ेंगी, कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा होगा, जिसका असर सीधे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। इसके अलावा, जब सुरक्षित एसेट जैसे बॉन्ड में अच्छा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट होने लगते हैं, जिससे शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बनता है।
ध्यान रखने वाली बातें
आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ रुपये की चाल पर भी पैनी नजर रखनी होगी। यदि ऊर्जा आयात की लागत अधिक बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक का विकास दर (Growth) पर फोकस करना मुश्किल हो सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी Monetary Policy Committee की बैठक और रेपो रेट पर होने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें।
