USD/INR: कच्चे तेल के दाम बढ़े, RBI ने संभाला रुपया, 95.74 के पास आई मजबूती

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
USD/INR: कच्चे तेल के दाम बढ़े, RBI ने संभाला रुपया, 95.74 के पास आई मजबूती

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को डॉलर बेचकर रुपये को सहारा दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कॉर्पोरेट की डॉलर मांग के बीच, RBI के इस कदम से रुपये की अस्थिरता को कम करने में मदद मिली है।

RBI का बड़ा कदम: रुपये को मिला सहारा

मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय रुपये की चाल को थामने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ट्रेडर्स ने देखा कि सरकारी बैंकों ने बाज़ार में डॉलर बेचे, जो कि केंद्रीय बैंक की एक आजमाई हुई रणनीति है ताकि रुपया ज़्यादा न गिरे। इस दखलंदाजी से रुपया पूरे दिन 95.74 प्रति डॉलर के आसपास ही कारोबार करता रहा।

रुपये पर दबाव की वजहें

रुपये पर दबाव की मुख्य वजहें बाहरी आर्थिक कारक हैं। कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में उछाल आया है, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग $92.45 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं। चूँकि भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए बढ़ती कीमतें डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा कमजोर हो सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 99.04 पर बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनावों, जिसमें ईरान पर नए प्रतिबंध भी शामिल हैं, के कारण सुरक्षित निवेश की मांग से डॉलर को मजबूती मिली है।

RBI के पास है बड़ा खज़ाना

केंद्रीय बैंक इस अस्थिरता को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहा है। 21 अगस्त 2026 की रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI ने अपनी विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधाओं के माध्यम से $73 बिलियन जुटाए हैं। रिजर्व का यह विशाल भंडार नियामक को ज़रूरत पड़ने पर बाज़ार को व्यवस्थित रखने और रुपये के मूल्य में अचानक गिरावट को रोकने के लिए दखल देने की ताकत देता है।

शेयर बाज़ार का हाल

मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में भी इस बड़ी अनिश्चितता का असर दिखा। BSE सेंसेक्स 30 अंकों की गिरावट के साथ 77,336.32 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 38.80 अंक गिरकर 24,179.50 पर आ गया। बेंचमार्क में शुरुआती गिरावट के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय इक्विटी में शुद्ध खरीदारी की थी, जो बाज़ार में कुछ लचीलापन दर्शाता है।

आगे क्या?

निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से अल्पकालिक अस्थिरता कम हो सकती है, लेकिन जोखिम बने हुए हैं। डॉलर की लगातार कॉर्पोरेट मांग, अप्रत्याशित कच्चे तेल की कीमतों के साथ मिलकर, रुपये के लिए एक निरंतर संतुलन का कार्य बनाती है। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो RBI को फॉरेक्स बाज़ारों में सक्रिय रहना पड़ सकता है। निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य यह होगा कि ये मैक्रो कारक - विशेष रूप से मुद्रा की स्थिरता और कच्चे माल की लागत - आने वाली तिमाहियों में विनिर्माण और ऊर्जा जैसे आयात-भारी क्षेत्रों के वित्तीय प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.