सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब **1%** चढ़कर **95.76** के स्तर पर पहुंच गया है। RBI ने रुपये में जारी गिरावट को रोकने के लिए इमरजेंसी कदम उठाते हुए सरकारी तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो खोली है और करेंसी डेरिवेटिव नियमों को सख्त कर दिया है।
भारतीय रुपया सोमवार, 12 अक्टूबर, 2026 को जोरदार रिकवरी के साथ 95.76 से 95.81 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यह कदम RBI द्वारा वीकेंड पर लिए गए उन फैसलों का नतीजा है, जिनका मकसद रुपये को उस रिकॉर्ड निचले स्तर से बचाना था जहां यह इस महीने की शुरुआत में पहुंच गया था। हालांकि, साल-दर-साल के आधार पर देखें तो रुपया अब भी 6.6% से 7% तक कमजोर बना हुआ है।
तेल कंपनियों के लिए 'स्पेशल डॉलर विंडो'
स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग को कम करने के लिए, RBI ने तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियों—Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum के लिए एक स्पेशल डॉलर विंडो की सुविधा दी है। इससे अब इन कंपनियों को सीधे सेंट्रल बैंक से डॉलर मिल सकेंगे, जिससे ओपन मार्केट में डॉलर खरीदने का दबाव कम होगा और रुपये को मजबूती मिलेगी।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग के बदले नियम
सट्टेबाजी (Speculation) पर लगाम लगाने के लिए रेगुलेटर ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियमों को भी सख्त कर दिया है:
- $2 मिलियन से बड़े डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर अब 20% कैश रिजर्व रखना अनिवार्य होगा।
- बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर वाले सट्टा ट्रेड की सीमा को घटाकर $5 मिलियन कर दिया गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम फिलहाल राहत जरूर दे रहे हैं, लेकिन रुपये के सामने चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर निवेशकों का झुकाव, रुपये के लिए बड़ी बाधा बने हुए हैं। कंपनियों के लिए अब हेजिंग (Hedging) लागत बढ़ सकती है, जिसके चलते उन्हें अपनी रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रेटजी में बदलाव करने की जरूरत होगी। अब देखना यह है कि क्या ये उपाय लंबे समय तक रुपये की गिरावट को थाम पाएंगे या मार्केट के स्ट्रक्चरल दबाव फिर हावी होंगे।
