RBI का बड़ा बयान: भारतीय रुपया अभी भी 'Undervalued', क्या आने वाली है जोरदार रिकवरी?

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का बड़ा बयान: भारतीय रुपया अभी भी 'Undervalued', क्या आने वाली है जोरदार रिकवरी?

RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा है कि भारतीय रुपया (Indian Rupee) वर्तमान में अपनी वास्तविक कीमत से काफी नीचे है। उन्होंने साफ किया कि हालिया गिरावट का कारण देश की आर्थिक कमजोरी नहीं, बल्कि अस्थायी बाहरी कारक हैं।

रुपया कमजोर, पर अर्थव्यवस्था मजबूत

RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के अनुसार, मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच भारतीय रुपये में 13.1% की गिरावट आई है, लेकिन यह आंकड़ा देश की 7-8% की आर्थिक ग्रोथ के साथ मेल नहीं खाता। RBI का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ शॉर्ट-टर्म कैपिटल आउटफ्लो (पूंजी का बाहर जाना) का नतीजा है, न कि अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स की खराबी।

क्यों गिरा रुपया और क्या है असर?

RBI ने इस अस्थिरता के पीछे ग्लोबल स्तर पर क्रूड ऑयल और सोने की ऊंची कीमतों को जिम्मेदार ठहराया है। इसके कारण फिस्कल ईयर 2025-26 में बैलेंस ऑफ पेमेंट $23.6 बिलियन के घाटे में चला गया। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि रुपया कमजोर होने से पेंट, केमिकल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ जाते हैं, जबकि IT और फार्मा जैसी एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर की कंपनियों की कमाई पर असर पड़ता है।

आगे का रास्ता और उम्मीदें

केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि जल्द ही करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) घटकर GDP के 1% से नीचे आ जाएगा। नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स और वैकल्पिक ऊर्जा (Alternative Energy) की ओर बढ़ता कदम इंपोर्ट बिल को कम करेगा। RBI ने साफ कर दिया है कि फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में जरूरत पड़ने पर वे दखल देंगे ताकि ज्यादा अस्थिरता न हो।

अगले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतें और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) का फ्लो यह तय करेगा कि रुपया अपनी खोई हुई चमक कब वापस पाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.