RBI House Price Index: पहली तिमाही में घरों की कीमतों में **1.1%** की बढ़ोतरी, सालाना ग्रोथ **3.6%** पर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI House Price Index: पहली तिमाही में घरों की कीमतों में **1.1%** की बढ़ोतरी, सालाना ग्रोथ **3.6%** पर

RBI के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, FY27 की पहली तिमाही में भारत में घरों की कीमतों में **1.1%** की बढ़ोतरी हुई है। इंडेक्स **117.5** पर पहुँच गया है, लेकिन सालाना ग्रोथ रेट पिछले क्वार्टर के **4.5%** से घटकर **3.6%** हो गया है, जो मार्केट की रफ़्तार में नरमी का संकेत देता है।

प्रॉपर्टी की कीमतों में आई नरमी

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 2026-27 के वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के लिए जारी किए गए ऑल-इंडिया हाउस प्राइस इंडेक्स (HPI) के ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि आवासीय रियल एस्टेट बाज़ार में तेज़ी तो है, लेकिन उसकी रफ़्तार थोड़ी धीमी पड़ रही है। यह इंडेक्स 18 प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की ट्रांजेक्शन कीमतों को ट्रैक करता है। तिमाही-दर-तिमाही (quarter-on-quarter) आधार पर इसमें 1.1% की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, सालाना (annual) आधार पर HPI में 3.6% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो प्रॉपर्टी सेक्टर में जारी गतिविधि को दर्शाता है।

सालाना ग्रोथ में आई कमी

जहां 1.1% की तिमाही बढ़ोतरी खरीदारों की सक्रियता का संकेत देती है, वहीं 3.6% की सालाना ग्रोथ पिछले वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में दर्ज 4.5% की सालाना ग्रोथ की तुलना में नरमी दिखाती है। साल-दर-साल (year-on-year) कीमतों में यह कमी प्रॉपर्टी साइकल को समझने के लिए एक अहम आंकड़ा है। जून 2026 तिमाही के लिए इंडेक्स का स्तर 117.5 रहा।

प्रॉपर्टी की कीमतों को चलाने वाले रीजनल फैक्टर्स

RBI प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी से सीधे मिले ट्रांजेक्शन-लेवल डेटा का उपयोग करके यह इंडेक्स तैयार करता है। ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि देश भर में कीमतों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं हुई है। पहली तिमाही में कीमतों में हुई बढ़ोतरी में चंडीगढ़, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों का अहम योगदान रहा। यह रीजनल अंतर इस बात पर प्रकाश डालता है कि जहां कुछ टियर-2 शहरों में स्थानीय मांग मजबूत है, वहीं प्रमुख मेट्रो शहरों में कीमतों के रुझान अलग हो सकते हैं।

रियल एस्टेट में इन्वेस्टर्स के लिए अहम जानकारी

रियल एस्टेट सेक्टर पर नज़र रखने वाले इन्वेस्टर्स के लिए ये आंकड़े डेवलपर्स की प्राइसिंग पावर और प्रॉपर्टी की कुल मांग का बैरोमीटर का काम करते हैं। सालाना प्राइस ग्रोथ में नरमी का मतलब यह हो सकता है कि पिछली तिमाहियों में देखी गई कीमतों में तेज़ वृद्धि अब स्थिर हो रही है। इसमें ब्याज दरों का माहौल, जो मॉर्टगेज की सामर्थ्य को प्रभावित करता है, और बाज़ार में आने वाली नई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की सप्लाई जैसे कई फैक्टर शामिल हो सकते हैं।

बढ़ती ब्याज दरें आम तौर पर घर खरीदारों के सेंटीमेंट को कम करती हैं, जिससे डेवलपर्स को बिक्री की मात्रा बनाए रखने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी को नियंत्रित करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, यदि मांग मजबूत बनी रहती है, तो डेवलपर्स निर्माण लागत में वृद्धि को ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इन्वेस्टर्स अक्सर इन HPI आंकड़ों पर सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों की तिमाही आय के साथ नज़र रखते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कीमतों में धीमी ग्रोथ या बढ़ती लागतों के कारण मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है या नहीं। अगले कुछ तिमाहियों के लिए डेवलपर्स की इन्वेंटरी को मैनेज करने की क्षमता और उचित मूल्य बिंदु बनाए रखना मुख्य मॉनिटरेबल रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.