भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा ऐलान करते हुए बेंचमार्क रेपो रेट को **5.25%** पर बरकरार रखा है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है, और केंद्रीय बैंक महंगाई के जोखिमों पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है।
क्या है RBI का बड़ा ऐलान?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। 19 अगस्त, 2026 को जारी मिनट्स के अनुसार, कमेटी के सभी छह सदस्यों ने एकमत होकर दरों को अपरिवर्तित रखने का समर्थन किया। यह कदम महंगाई के रुझानों पर अधिक निश्चितता आने तक एक सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है।
ग्रोथ पर भरोसा, पर महंगाई का डर?
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, केंद्रीय बैंक के अपडेटेड अनुमान विकास की उम्मीदों और महंगाई को लेकर सावधानी का मिश्रण पेश करते हैं। RBI ने 2026-27 के लिए रियल GDP ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। वहीं, महंगाई के मोर्चे पर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के लिए सालाना अनुमान को 5.1% से थोड़ा घटाकर 5.0% कर दिया गया है। इस सुधार के बावजूद, केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि खाद्य और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता के कारण इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में CPI महंगाई 5.9% के शिखर पर पहुंच सकती है।
न्यूट्रल स्टैंस क्यों?
गवर्नर संजय मल्होत्रा और MPC अभी भी इस बात को लेकर सहज नहीं हैं कि महंगाई कम बनी रहेगी, इसलिए वे 'इंतजार करो और देखो' की रणनीति अपना रहे हैं। 'न्यूट्रल' स्टैंस का मतलब है कि RBI अपने विकल्पों को खुला रख रहा है - न तो ब्याज दरों में कटौती की जल्दी है और न ही उन्हें बढ़ाने की कोई योजना है। मुख्य चिंता सप्लाई-साइड झटके हैं, जहां आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अप्रत्याशित बदलाव व्यापक महंगाई को बढ़ा सकते हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं का असर
कई बाहरी कारक इस झिझक में योगदान दे रहे हैं। अमेरिका-ईरान संघर्ष जारी रहने से वैश्विक ऊर्जा लागत और सप्लाई चेन में व्यवधानों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जो घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है। इसके अतिरिक्त, मानसून की बारिश का अनियमित वितरण जैसे मौसम संबंधी जोखिम, कृषि आपूर्ति और खाद्य कीमतों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बने हुए हैं।
बाज़ार और निवेशकों पर असर
19 अगस्त को भारतीय इक्विटी बाज़ार, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी शामिल हैं, में गिरावट देखी गई। हालांकि, यह गिरावट RBI की नीतिगत निर्णय के बजाय कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे वैश्विक दबावों के कारण अधिक थी। उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए, स्थिर रेपो रेट का मतलब है कि निकट भविष्य में ऋणों पर ब्याज दरों में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना नहीं है।
आगे बढ़ते हुए, निवेशकों और उधारकर्ताओं को आगामी महंगाई डेटा, खाद्य आपूर्ति पर मानसून के पैटर्न के निरंतर प्रभाव और वैश्विक ऊर्जा की कीमतों पर नज़र रखनी चाहिए। ये संकेतक केंद्रीय बैंक के लिए यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे कि उसे अपनी वर्तमान नीतिगत दिशा को कब और कैसे बदलने की आवश्यकता है।
