भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी अगस्त 2026 की बैठक में प्रमुख ब्याज दर (रेपो रेट) को **5.25%** पर स्थिर रखा है। हालांकि, जुलाई में खुदरा महंगाई **4.45%** के 19 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, लेकिन RBI ने **6.7%** का जीडीपी ग्रोथ अनुमान बनाए रखा है। अब बाजार की निगाहें कच्चे तेल की कीमतों और मॉनसून की चाल पर टिकी हैं।
RBI की MPC का बड़ा ऐलान: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी अगस्त 2026 की अहम बैठक में सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय बैंक खुदरा (CPI) और थोक (WPI) महंगाई के बीच बड़े अंतर से जूझ रहा है। बाजार विश्लेषकों ने इसे "chalk and cheese" वाली स्थिति बताया है, क्योंकि आर्थिक स्वास्थ्य के संकेत मिले-जुले हैं।
खुदरा महंगाई में उछाल, थोक महंगाई डरा रही
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई जुलाई 2026 में बढ़कर 4.45% हो गई, जो पिछले 19 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, यह आंकड़ा RBI के निर्धारित दायरे में है, लेकिन बढ़ती महंगाई ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर, कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) आधारित महंगाई डबल डिजिट में पहुंच गई है। यह अंतर नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है कि क्या कीमतें सिर्फ अस्थायी तौर पर बढ़ी हैं या इनका असर अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक रहेगा।
गवर्नर के बयानों में विरोधाभास?
इस बीच, SBI रिसर्च जैसी रिपोर्ट्स ने MPC की मीटिंग मिनट्स में दर्शाए गए सख्त रुख और गवर्नर संजय मल्होत्रा के अधिक धैर्यपूर्ण व डेटा-केंद्रित संचार शैली के बीच एक बड़ा गैप उजागर किया है। इस अंतर ने बाजार को भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव की समय-सीमा को लेकर अनिश्चित कर दिया है।
ग्रोथ का भरोसा बरकरार, पर जोखिम भी
महंगाई के दबाव के बावजूद, RBI घरेलू ग्रोथ को लेकर सकारात्मक है। RBI ने FY27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 6.6% कर दिया है, जो घरेलू मांग में मजबूती का संकेत देता है। इसके अलावा, RBI ने सालाना CPI महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में 5.9% के अनुमानित शिखर के बाद महंगाई में नरमी आएगी।
हालांकि, आर्थिक परिदृश्य में बड़े जोखिम भी मौजूद हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, जो कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं, RBI के लिए एक बड़ी चिंता बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त, मॉनसून की अनिश्चितता खाद्य कीमतों और ग्रामीण मांग पर भारी पड़ सकती है, जो नीतिगत रुख को बदल सकती है। अगर खाद्य और ईंधन की कीमतें स्थिर नहीं होती हैं, तो यह दबाव व्यापक महंगाई में बदल सकता है।
बाजार की प्रतिक्रिया और आगे क्या?
इन मिले-जुले आर्थिक संकेतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, अगस्त के अंत में भारतीय इक्विटी बाजार, जिनमें सेंसेक्स और निफ्टी शामिल हैं, दबाव में रहे। भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य RBI की इन विपरीत महंगाई प्रवृत्तियों को वर्तमान ग्रोथ की गति को बाधित किए बिना प्रबंधित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। बाजार सहभागियों की निगाहें मैनेजमेंट की कमेंट्री में किसी भी बदलाव या वैश्विक ऊर्जा लागतों में महत्वपूर्ण हलचल पर रहेंगी, जो केंद्रीय बैंक के आगामी नीतिगत निर्णयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।
