RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट स्थिर, ग्रोथ अनुमान बढ़ा; रुपया और बॉन्ड में मुनाफावसूली

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट स्थिर, ग्रोथ अनुमान बढ़ा; रुपया और बॉन्ड में मुनाफावसूली

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखने का फैसला किया है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर (Growth) का अनुमान बढ़ाकर **6.7%** कर दिया है।

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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में यह निर्णय लिया गया। केंद्रीय बैंक ने अपनी 'न्यूट्रल' (Neutral) यानी तटस्थ नीतिगत रुख को बरकरार रखा है, जिसका अर्थ है कि विकास और महंगाई के बीच संतुलन साधने पर जोर दिया जा रहा है।

विकास दर और महंगाई का अनुमान:

  • RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।
  • वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान घटाकर 5% किया गया है।

बाजार की प्रतिक्रिया: शुरुआत में तेजी, फिर मुनाफावसूली

शुरुआत में, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भू-राजनीतिक (Geopolitical) मोर्चे पर सकारात्मक खबरों के चलते बाजार में जोश दिखा। डॉलर के मुकाबले रुपया 94.89 के स्तर तक मजबूत हुआ था और 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (Yield) भी शुरुआती कारोबार में नीचे आई थी।

हालांकि, RBI गवर्नर के बयान के बाद यह तेजी फीकी पड़ गई। मल्होत्रा ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) को काबू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इस चेतावनी भरे रुख ने निवेशकों को सावधान कर दिया और मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिली। आखिर में, रुपया 95.13 प्रति डॉलर के करीब बंद हुआ, जबकि 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड करीब 6.78% पर बंद हुई।

पिछली साल की परफॉर्मेंस और मैक्रो जोखिम

पिछले एक साल में, वैश्विक दबावों के चलते रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 7.7% कमजोर हुआ है। वहीं, 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 44 बेसिस प्वाइंट (Basis Points) की बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष में अब तक बॉन्ड यील्ड में 26 बेसिस प्वाइंट की कुछ नरमी आई है।

RBI की नजर कई जोखिमों पर बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता सप्लाई चेन और व्यापार मार्गों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून की अनिश्चितता कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर डाल सकती है। ये सभी कारक महंगाई की दिशा को जटिल बनाते हैं, जिसके कारण RBI जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय डेटा-आधारित (Data-Dependent) नीति पर कायम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.