RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट स्थिर, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट स्थिर, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखा है। महंगाई को काबू में रखते हुए ग्रोथ को सहारा देने के लिए 'न्यूट्रल' स्टैंड बनाए रखा गया है। वहीं, RBI ने 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **6.7%** कर दिया है।

RBI ने क्यों नहीं बदला रेपो रेट?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने 5 अगस्त 2026 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। यह कदम अर्थव्यवस्था की घरेलू ग्रोथ को बढ़ावा देने और महंगाई पर कड़ी नजर रखने के बीच संतुलन साधने की कोशिश को दर्शाता है।

ग्रोथ और महंगाई का कैसा है हाल?

जून 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.38% रही, जो RBI के 4% के लक्ष्य से थोड़ी ऊपर है। इसके बावजूद, RBI को देश की आर्थिक रफ्तार पर भरोसा है। एक सकारात्मक खबर यह है कि RBI ने 2026-27 के लिए रियल GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो पहले 6.6% था। साथ ही, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए महंगाई का अनुमान घटाकर 5.0% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हालिया महंगाई में बढ़त की मुख्य वजह सप्लाई-साइड की समस्याएं हैं, खासकर खाने-पीने और ईंधन के दाम। 'न्यूट्रल' पॉलिसी स्टैंड का मतलब है कि RBI भविष्य के आंकड़ों के हिसाब से फैसले लेने में लचीलापन बनाए रखेगा।

निवेशक 2027 पर क्यों दे रहे हैं ध्यान?

हालांकि मौजूदा पॉलिसी स्थिर है, लेकिन अर्थशास्त्री अब 2027 की शुरुआत में संभावित ब्याज दर में बदलाव की ओर देख रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (जैसे ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित करने वाले संघर्ष) के कारण लागतें ऊंची बनी रहती हैं, तो RBI को मांग को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं, क्योंकि यह तेजी से व्यापक महंगाई का दबाव पैदा कर सकती हैं।

जोखिम और निगरानी

घरेलू आर्थिक स्थितियां मजबूत दिख रही हैं, खासकर कृषि क्षेत्र खाद्य कीमतों में अचानक वृद्धि के खिलाफ एक सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है। बेहतर सिंचाई और मशीनीकरण से ग्रामीण आय स्थिर हो रही है, जो खपत की मांग का समर्थन करती है। हालांकि, RBI वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क है। केंद्रीय बैंक कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और संभावित सप्लाई चेन में रुकावटों जैसे जोखिमों की निगरानी कर रहा है, जो महंगाई की दिशा बदल सकते हैं।

निवेशक भविष्य की पॉलिसी के संकेतों के लिए आने वाले मासिक महंगाई आंकड़ों और वैश्विक तेल की कीमतों पर नजर रखेंगे। यह तथ्य कि RBI वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा ऊंची उधार लागत बनाए रखने के बावजूद दरों को स्थिर रखने के लिए तैयार है, यह दर्शाता है कि जब तक मूल्य स्थिरता की अनुमति होगी, तब तक घरेलू विकास चक्र का समर्थन करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.