RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने चेतावनी दी है कि एनर्जी इंपोर्ट पर निर्भरता देश की इकोनॉमी के लिए जोखिम है। इसे कम करने के लिए सरकार ने **₹84,000 करोड़** के 'Samudra Manthan' ऑफशोर एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है, जो **2031** तक चलेगा।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने साफ कर दिया है कि भारत को लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए ऑयल और गैस इंपोर्ट पर अपनी निर्भरता को कम करना ही होगा। ग्लोबल मार्केट में बढ़ते तनाव और प्राइस शॉक के बीच यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। सरकार ने ₹84,000 करोड़ के निवेश के साथ 'Samudra Manthan' प्रोजेक्ट का आगाज़ किया है, जो अगले कुछ सालों में भारत के एनर्जी सेक्टर की दिशा बदल सकता है।
इकोनॉमी और रुपए पर असर
वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें अक्सर अस्थिर रहती हैं। जब ऑयल महंगा होता है, तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है, जिससे रुपए पर दबाव पड़ता है और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) चौड़ा हो जाता है। इस डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य देश के भीतर ही हाइड्रोकार्बन का प्रोडक्शन बढ़ाना है, ताकि ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव का असर कम हो सके।
एनर्जी कंपनियों के लिए क्या है मौका?
यह पहल अपस्ट्रीम एनर्जी सेक्टर की बड़ी कंपनियों जैसे ONGC और Oil India के लिए एक गेम-चेंजर हो सकती है। इन कंपनियों को इस बड़े प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा गया है। अगर प्रोडक्शन में बढ़ोतरी होती है, तो इन कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां इतने महंगे और टेक्निकल प्रोजेक्ट्स की लागत को कैसे मैनेज करती हैं।
चुनौतियां और भविष्य
डीप-वॉटर ड्रिलिंग कोई आसान काम नहीं है। इसमें भारी-भरकम टेक्नोलॉजी और कैपिटल की जरूरत होती है। इतिहास गवाह है कि ऑफशोर प्रोजेक्ट्स में अक्सर देरी होती है, इसलिए असली मुनाफा इस बात पर निर्भर करेगा कि काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और कितनी बड़ी मात्रा में ऑयल रिजर्व मिलते हैं। निवेशकों को अब पेट्रोलियम मंत्रालय के अपडेट्स और इन कंपनियों के प्रोडक्शन टारगेट्स पर खास ध्यान देना होगा।
