रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एकजुट होने का आह्वान किया है। उनका मानना है कि प्रोटेक्शनिज्म और बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितताओं से लड़ने के लिए डेवलपिंग देशों को कलेक्टिव बारगेनिंग करनी होगी, ताकि ट्रेड टर्म्स और एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत किया जा सके।
आर्थिक संप्रभुता और ग्लोबल साउथ की ताकत
'इंडिया एंड इमर्जिंग इकोनॉमिक ऑर्डर फोरम' में गवर्नर शक्तिकांत दास ने साफ किया कि व्यक्तिगत तौर पर उभरते बाजारों के लिए बड़े ग्लोबल पावर्स के सामने अपने ट्रेड टर्म्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तें मनवाना मुश्किल है। उन्होंने एक सामूहिक फ्रंट बनाने का सुझाव दिया है, ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन में ये देश बेहतर मोल-भाव कर सकें।
एनर्जी इंडिपेंडेंस क्यों है जरूरी?
मिडिल ईस्ट में बढ़ती जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता ने भारत जैसे नेट-इम्पोर्टर देशों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। गवर्नर ने जोर दिया कि क्रूड ऑयल और एनर्जी के लिए बाहरी निर्भरता को कम करना सिर्फ क्लाइमेट गोल नहीं, बल्कि इकोनॉमिक जरूरत है। रिन्यूएबल एनर्जी और बायोफ्यूल्स की ओर बढ़ना देश के फिस्कल हेल्थ और फॉरेक्स रिजर्व के लिए अनिवार्य है।
भारत का 'डिजिटल' दांव: India Stack
भारत अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी 'India Stack' को अन्य देशों के साथ साझा कर रहा है। इसका मकसद दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स को अपना स्वतंत्र और मजबूत डिजिटल पेमेंट फ्रेमवर्क बनाने में मदद करना है। यह कदम ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम पर निर्भरता को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
आने वाले समय में क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (Regional Trade Alliances) में तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे ये देश मिलकर स्टेबल और कैपिटल-फ्रेंडली रेगुलेटरी माहौल तैयार करते हैं, जो लॉन्ग-टर्म प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित कर सके।
