आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने वैश्विक व्यापार अस्थिरता से बचने के लिए भारत को अपने रणनीतिक तेल भंडार (strategic oil reserves) को मजबूत करने की सलाह दी है। उन्होंने 'रणनीतिक आत्मनिर्भरता' पर जोर दिया है, जो वैश्विक झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जरूरी है।
ऊर्जा सुरक्षा और तेल भंडार की जरूरत
पूर्व आरबीआई गवर्नर सी. रंगराजन ने अर्थव्यवस्था को ग्लोबल सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक अस्थिरता से बचाने के लिए भारत के विकास मॉडल में बदलाव की बात कही है। ICFAI फाउंडेशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे व्यापार मार्गों में रुकावटें इस बात का संकेत हैं कि जरूरी इनपुट के लिए ग्लोबल मार्केट पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने कच्चे तेल के बड़े बफर स्टॉक बनाने का सुझाव दिया है ताकि वैश्विक संघर्षों से होने वाली कीमतों में उछाल से बचा जा सके और महंगाई पर लगाम लगाई जा सके।
'आत्मनिर्भरता' की नई परिभाषा
रंगराजन ने 'आत्मनिर्भर' भारत की अवधारणा पर एक संतुलित राय दी है। उन्होंने पुरानी संरक्षणवादी नीतियों से बचने की सलाह दी, जिनसे घरेलू उद्योग अक्सर अक्षम हो जाते हैं। इसके बजाय, उन्होंने 'रणनीतिक आत्मनिर्भरता' (strategic self-reliance) का प्रस्ताव रखा, जहां फोकस प्रतिस्पर्धी दक्षता (competitive efficiency) पर हो। उनका मानना है कि घरेलू उत्पादन की गुणवत्ता ग्लोबल मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, न कि केवल आयात का महंगा विकल्प।
लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति
निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए मुख्य संदेश संरचनात्मक सुधारों का है। रंगराजन के अनुसार, सतत विकास के लिए घरेलू उत्पादकता और भौतिक बुनियादी ढांचे में सुधार करना अनिवार्य है। उन्होंने दक्षिण कोरिया और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार (R&D) के जरिए ही भारत ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि सरकार कैसे इन रणनीतिक प्राथमिकताओं और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाती है, क्योंकि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा और R&D पर निवेश एक प्रमुख थीम रहने वाली है।
