RBI डिप्टी गवर्नर: भारत की GDP ग्रोथ 6.7% के अनुमान से ज़्यादा रहने की उम्मीद!

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI डिप्टी गवर्नर: भारत की GDP ग्रोथ 6.7% के अनुमान से ज़्यादा रहने की उम्मीद!

RBI की डिप्टी गवर्नर डॉ. पूनम गुप्ता ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ग्लोबल जोखिमों के सामने मजबूती दिखा रही है। ग्रोथ रेट 6.7% के शुरुआती अनुमान से बेहतर रहने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) स्थिर होगा और FDI इनफ्लो बढ़ेगा, हालांकि, तेल की कीमतें और टैरिफ पर नज़र रखनी होगी।

ग्लोबल मुश्किलों का सामना

RBI की डिप्टी गवर्नर डॉ. पूनम गुप्ता के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर ग्रोथ की राह पर है और चालू वित्त वर्ष के लिए 6.7% का शुरुआती अनुमान पार कर सकती है। 20 अगस्त 2026 को मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में बोलते हुए, डॉ. गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद, घरेलू मांग (Domestic Demand) और मजबूत नीतिगत ढांचे (Policy Frameworks) आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहे हैं।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि अर्थव्यवस्था वर्तमान में तीन बड़े झटकों का सामना कर रही है: अमेरिकी टैरिफ का असर, वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं। इन दबावों के बावजूद, RBI ग्रोथ को लेकर आशावादी है और मान रही है कि आर्थिक विस्तार अब ज़्यादा व्यापक आधार पर हो रहा है। पहले जहां ग्रोथ केवल इनपुट बढ़ाने पर निर्भर थी, वहीं हालिया रुझान श्रम (Labour) और पूंजी (Capital) की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ टोटल फैक्टर प्रोडक्टिविटी (Total Factor Productivity) में वृद्धि दिखा रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि अर्थव्यवस्था की अंदरूनी ग्रोथ क्षमता मजबूत हो रही है।

करंट अकाउंट और FDI का आउटलुक

घरेलू ग्रोथ के अलावा, भारत का बाहरी क्षेत्र, जिसमें व्यापार और निवेश प्रवाह शामिल हैं, भी मजबूत दिख रहा है। डॉ. गुप्ता ने संकेत दिया कि चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम हो रहा है और अगले कुछ वर्षों में इसके स्थिर होने की उम्मीद है, बशर्ते ऊर्जा बाजारों में कोई बड़ा अप्रत्याशित झटका न लगे।

अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भी मजबूत बना हुआ है। अनुमान है कि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) इनफ्लो में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, और यह सालाना $150 बिलियन तक पहुंच सकता है, यदि मौजूदा रुझान जारी रहते हैं। FDI का स्थिर प्रवाह अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दीर्घकालिक पूंजी (Long-term Capital) प्रदान करता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और व्यावसायिक विस्तार को बढ़ावा देता है।

आर्थिक जोखिम जिन पर नज़र

लंबी अवधि के सकारात्मक दृष्टिकोण के बावजूद, RBI की टिप्पणियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आर्थिक प्रगति जोखिमों से रहित नहीं है। निवेशक और नीति निर्माता लगातार उन कई कारकों की निगरानी कर रहे हैं जो स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से, वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति प्रबंधन (Inflation Management) और देश की राजकोषीय स्थिति (Fiscal Position) के लिए सीधा खतरा पैदा करती हैं। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा नए व्यापार टैरिफ का कार्यान्वयन और प्रतिकूल वर्षा पैटर्न का जोखिम महत्वपूर्ण चर बने हुए हैं। ये कारक व्यवसायों के लिए लागत दबाव पैदा कर सकते हैं और उपभोक्ता मांग को प्रभावित कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए, मुख्य निगरानी यह रहेगी कि अर्थव्यवस्था इन बाहरी दबावों को घरेलू मजबूती के साथ कैसे संतुलित करती है। आने वाले महीनों पर ध्यान इस बात पर रहेगा कि नीतिगत उपाय आयात लागतों को प्रभावी ढंग से कैसे प्रबंधित करते हैं और सेवाओं तथा औद्योगिक गतिविधियों में गति को कैसे बनाए रखते हैं, जो हालिया आर्थिक विस्तार के प्राथमिक चालक रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.