रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी स्पेशल USD-INR स्वैप सुविधा को बंद कर दिया है। इस स्कीम के जरिए कंपनी ने **$52.3 बिलियन** का रिकॉर्ड FCNR(B) डिपॉजिट जुटाया है, जिससे भारत का फॉरेक्स रिजर्व काफी मजबूत हो गया है और रुपये को ग्लोबल अनिश्चितता के बीच एक बड़ा सुरक्षा कवच मिला है।
फॉरेक्स रिजर्व में आया ऐतिहासिक उछाल
जून 2026 में शुरू की गई इस स्पेशल स्वैप विंडो का लक्ष्य ग्लोबल फाइनेंशियल अनिश्चितता के दौर में रुपये को सपोर्ट देना और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना था। आरबीआई की यह पहल बेहद सफल रही और कुल $56.8 बिलियन की लिक्विडिटी मोबिलाइजेशन कोशिशों में से $52.3 बिलियन का बड़ा हिस्सा सिर्फ FCNR डिपॉजिट्स के जरिए आया है। इस मजबूती के बाद भारत का फॉरेक्स रिजर्व $707 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो किसी भी बाहरी झटके को झेलने के लिए एक बफर का काम करेगा।
इकोनॉमी की रफ्तार बरकरार
कैपिटल इनफ्लो का यह रिकॉर्ड ऐसे समय पर आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से जीडीपी ग्रोथ दर्ज कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही के ये आंकड़े उम्मीदों से बेहतर हैं, जिसका श्रेय मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को जाता है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, यह ग्रोथ पिछले एक दशक में किए गए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स का नतीजा है।
निवेशकों के लिए सावधानी
भले ही देश का खजाना भर गया हो, लेकिन ग्लोबल स्तर पर अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं। निवेशकों को कमोडिटी प्राइस में उतार-चढ़ाव और एनर्जी सप्लाई की दिक्कतों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये भारत के इम्पोर्ट बिल को प्रभावित कर सकते हैं। आरबीआई अब लिक्विडिटी को सावधानी से मैनेज कर रहा है ताकि बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा न आए, जो महंगाई को बढ़ा सकता है। आने वाले समय में रुपये की वैल्यू और एक्सटर्नल डेट प्रेशर पर केंद्रीय बैंक के अगले कदम बाजार की दिशा तय करेंगे।
