RBI का बड़ा फैसला: रुपये को संभालने का बदला तरीका, अब डॉलर की बिकवाली से बचेगी तिजोरी!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: रुपये को संभालने का बदला तरीका, अब डॉलर की बिकवाली से बचेगी तिजोरी!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की स्थिरता बनाए रखने के अपने पुराने तरीके में बड़ा बदलाव किया है। अब RBI सिर्फ अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बेचकर रुपये को सहारा देने के बजाय, दूसरे तरीकों पर ज्यादा भरोसा कर रही है।

डॉलर की बिकवाली से क्यों बच रही RBI?

पहले जब भी भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता था, तो RBI बाजार में डॉलर बेचकर उसे मजबूती देने की कोशिश करती थी। इस तरीके से रुपये को फौरी राहत तो मिलती थी, लेकिन देश का डॉलर भंडार कम होने लगता था। यह तरीका लंबी अवधि में देश के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता था, क्योंकि संकट के समय में कम डॉलर भंडार का मतलब है कि RBI के पास दखल देने की क्षमता कम हो जाती है।

नए रास्ते: FCNR डिपॉजिट और बॉन्ड मार्केट

इसी को ध्यान में रखते हुए, जून से RBI ने अपने पैंतरे बदलने शुरू कर दिए हैं। अब RBI सीधे डॉलर बेचने के बजाय, विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के नए रास्ते तलाश रही है।

FCNR डिपॉजिट पर जोर: RBI, फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट को और ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश कर रही है। इससे ज्यादा से ज्यादा विदेशी मुद्रा बैंकिंग सिस्टम में आएगी, जिससे रुपये को बिना RBI के भंडार खर्च किए सहारा मिलेगा।

बॉन्ड मार्केट के रास्ते खुले: इसके अलावा, RBI ने फॉरेन इन्वेस्टर्स के लिए सरकारी बॉन्ड (Government Bonds) खरीदना अब आसान कर दिया है। पहले इन नियमों के चलते विदेशी निवेशक आसानी से भारतीय बॉन्ड में निवेश नहीं कर पाते थे। इन बाधाओं को हटाने से उम्मीद है कि ज्यादा विदेशी पैसा भारत आएगा। जब ये निवेशक भारतीय बॉन्ड खरीदेंगे, तो उन्हें पहले अपनी विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलना होगा, जिससे रुपये की मांग बढ़ेगी और उसकी कीमत को सहारा मिलेगा।

लंबी अवधि की स्थिरता पर फोकस

यह बदलाव दिखाता है कि RBI अब फौरी राहत के बजाय लंबी अवधि की स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे रही है। डॉलर बेचना अभी भी एक विकल्प है, लेकिन अब इसे अंतिम उपाय के तौर पर देखा जाएगा। RBI कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा स्वैप (Currency Swaps) जैसे दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रही है, जिससे उन्हें विदेशी कर्ज चुकाने में आसानी होगी और रुपये पर दबाव कम होगा। इस नई रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये बदलाव कितने प्रभावी ढंग से विदेशी निवेश को आकर्षित कर पाते हैं, जो देश के बाहरी खातों को संतुलित रखने और रुपये को स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.