Quick Commerce: भारत की फेस्टिव सेल में छाई 'क्विक कॉमर्स', कुल ऑनलाइन खर्च का **20%** हिस्सा होगा इनका

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Quick Commerce: भारत की फेस्टिव सेल में छाई 'क्विक कॉमर्स', कुल ऑनलाइन खर्च का **20%** हिस्सा होगा इनका

भारत में फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन खर्च में Quick Commerce का बोलबाला रहने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल फेस्टिव स्पेंडिंग का **20%** हिस्सा क्विक कॉमर्स कंपनियों के पास जाने का अनुमान है।

भारत का फेस्टिव ऑनलाइन रिटेल मार्केट $90 बिलियन के आंकड़े की ओर तेजी से बढ़ रहा है। Redseer Strategy Consultants के आंकड़ों के मुताबिक, क्विक कॉमर्स सेक्टर 25% की सालाना दर से ग्रो कर रहा है। अब तेजी से डिलीवरी पाना अर्बन ग्राहकों के लिए एक प्रीमियम सर्विस नहीं, बल्कि एक सामान्य उम्मीद बन चुका है।

ग्राहकों की पसंद में बड़ा बदलाव

फेस्टिव सीजन के दौरान ग्रोसरी सेगमेंट में 48% से 50% तक की ग्रोथ की उम्मीद है। वहीं, होम, फर्नीचर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के लिए यह आंकड़ा 32% से 40% तक रह सकता है। इसके उलट, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स कैटेगरी की चमक फीकी पड़ रही है, जो पहले फेस्टिव ग्रोथ का मुख्य आधार हुआ करते थे। अब ग्राहक स्नैक्स और प्रीमियम ड्रिंक्स जैसे इम्पल्स बाइंग प्रोडक्ट्स पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

टियर-2 शहरों का दम और बिजनेस रिस्क

क्विक कॉमर्स का दायरा अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 शहरों में फैशन और ब्यूटी कैटेगरी की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा, Gen Z यूजर्स, जो कुल यूजर बेस का 40% हैं, इस डिमांड को रफ्तार दे रहे हैं। हालांकि, यह मॉडल 'डार्क स्टोर्स' और बड़े डिलीवरी नेटवर्क पर टिका है, जिसके कारण लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज का खर्च कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।

कॉम्पिटिशन का दबाव

पारंपरिक ई-कॉमर्स कंपनियां भी अब इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहतीं। मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बचाने के लिए वे भी फास्ट डिलीवरी ऑप्शन पर जोर दे रही हैं। निवेशकों को आने वाले क्वार्टरली नतीजों में कंपनियों के 'यूनिट इकोनॉमिक्स' और डिलीवरी एफिशिएंसी पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि डिलीवरी समय कम करने की होड़ में खर्च काफी बढ़ रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.