पंजाब में भूजल (Groundwater) निकालने की दर साल **2025-26** के चक्र में घटकर **152.22%** पर आ गई है। साल **2021-22** में यह आंकड़ा **163.80%** था, जो अब सुधर रहा है। राज्य सरकार अब ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करने के लिए नहर आधारित सिंचाई (Canal-based irrigation) पर जोर दे रही है।
पंजाब की जल प्रबंधन स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं, हालांकि राज्य अभी भी गंभीर पारिस्थितिक दबाव का सामना कर रहा है। 2025-26 के लिए जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य का भूजल दोहन दर 152.22% है। यह 2021-22 में दर्ज 163.80% की दर से एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो दर्शाता है कि हालिया सरकारी नीतियों का असर जमीन पर दिखना शुरू हो गया है।
कृषि मांग और ब्लॉकों की स्थिति
भूजल पर सबसे बड़ा दबाव कृषि क्षेत्र का है, जिसने हालिया चक्र में कुल निकाले गए 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) में से 24.95 BCM पानी का उपयोग किया। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड के डेटा के मुताबिक, 153 में से 110 ब्लॉक अभी भी 'ओवर-एक्सप्लॉयटेड' यानी अत्यधिक दोहन वाली श्रेणी में हैं। हालांकि, यह संख्या पहले के 117 ब्लॉकों से कम है, लेकिन अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। राहत की बात यह है कि केवल 20 ब्लॉक ही 'सुरक्षित' श्रेणी में आ पाए हैं, जो जल संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
नहर आधारित सिंचाई की ओर बदलाव
इस असंतुलन को दूर करने के लिए, राज्य सरकार अब नहर आधारित सिंचाई प्रणाली को प्राथमिकता दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य फसल चक्र को ट्यूबवेल के पानी पर निर्भरता से मुक्त करना है। सरकार का लक्ष्य दूर-दराज के कृषि क्षेत्रों तक सतह का पानी (Surface water) पहुंचाना है ताकि भूजल स्तर पर दबाव कम हो सके। जिन इलाकों में नहरों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया गया है, वहां भूजल घटने की रफ्तार धीमी देखी गई है, जो पूरे राज्य के लिए एक मॉडल बन सकता है।
आर्थिक और परिचालन संदर्भ
धान और गेहूं की मोनोकल्चर खेती ने दशकों से जल निकासी और पुनर्भरण के अनुपात को बिगाड़ रखा है। एग्री-इनपुट और प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए, पंजाब में जल प्रबंधन की सफलता एक बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर है। नहर सिंचाई का प्रभावी क्रियान्वयन और फसल विविधीकरण (Crop diversification) एग्री-बिजनेस के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। इसके विपरीत, जल की कमी कृषि उत्पादकता और स्थानीय सप्लाई चेन के लिए बड़ा रिस्क बनी हुई है।
भविष्य के संकेत
आने वाले समय में इन सुधारों की स्थिरता पूरी तरह से सरकारी प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन और किसानों द्वारा कम पानी वाली फसलों को अपनाने पर निर्भर करेगी। निवेशकों को राज्य के बजट आवंटन और जल बुनियादी ढांचे की प्रगति पर बारीक नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही पंजाब की कृषि और आर्थिक सेहत की दिशा तय करेंगे।
