पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं **1,000** का आंकड़ा पार कर गई हैं। सबसे ज्यादा असर तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर में दिख रहा है। बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार ने **246** FIR दर्ज की हैं, जिसका असर आने वाले समय में उत्तर भारत के इंडस्ट्रियल ऑपरेशंस पर पड़ सकता है।
सरकारी सख्ती और जुर्माना
पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए राज्य प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत अब तक 246 FIR दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, पर्यावरण मुआवजे के तौर पर कुल ₹17 लाख का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से ₹13 लाख से ज्यादा की वसूली भी हो चुकी है।
इंडस्ट्री पर असर और रिस्क
बढ़ते प्रदूषण के कारण उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में अक्सर GRAP (Graded Response Action Plan) के कड़े नियम लागू कर दिए जाते हैं। इससे कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज के कामकाज के घंटों पर पाबंदी लग सकती है, जो निवेशकों और कंपनियों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है।
बायोमास में छिपे हैं अवसर
इन चुनौतियों के बीच, Commission for Air Quality Management (CAQM) पराली को इंडस्ट्रियल फ्यूल में बदलने पर जोर दे रहा है। यह बायोमास-आधारित एनर्जी प्रोडक्शन, ईंट भट्टों और थर्मल पावर प्लांट्स से जुड़ी कंपनियों के लिए एक अवसर की तरह है। फसल अवशेषों का ईंधन के रूप में इस्तेमाल न केवल लागत कम कर सकता है, बल्कि ESG मानकों को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। मार्केट एनालिस्ट इस बदलाव को बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं क्योंकि यह आने वाले समय में सप्लाई चेन में बड़े बदलाव ला सकता है।
