पंजाब में 2026-27 का धान खरीद सीजन शुरू तो हो गया है, लेकिन गोदामों में जगह न होने के कारण बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य में स्टॉक **270 लाख मीट्रिक टन** तक पहुंच गया है, जबकि क्षमता सिर्फ **180 लाख मीट्रिक टन** ही है।
पंजाब के खरीफ मार्केटिंग सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर से हो चुकी है, लेकिन सरकारी तंत्र के सामने इस समय एक बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौती है। राज्य के पास क्षमता से कहीं ज्यादा अनाज जमा है, जिससे मंडियों में आने वाले नए धान के लिए जगह नहीं बच रही है।
सरकार की क्या है मांग?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से तुरंत दखल की मांग की है। सरकार ने 10 अक्टूबर तक 6 लाख मीट्रिक टन चावल और अक्टूबर महीने के दौरान 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं को तुरंत वहां से हटाने (evacuate) का आग्रह किया है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो खरीद प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ने का डर है।
मिलर्स क्यों हैं परेशान?
संकट की एक बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा जारी नई 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) भी है। नए नियमों के तहत स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन को लेकर नियम काफी सख्त कर दिए गए हैं। अगर स्टॉक में कमी पाई जाती है, तो मिलर्स को ब्लैकलिस्ट करने और लागत वसूलने जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। इस वजह से मिलर्स नया स्टॉक लेने में हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि गोदामों में पहले से भरा पुराना स्टॉक उनके लिए मुसीबत न बन जाए।
आने वाले दिनों में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) और राज्य सरकार के बीच तालमेल ही तय करेगा कि खरीद सीजन सुचारू रूप से चलता है या नहीं।
