Indian Private Capex: निवेश का ऐलान **₹14.6 लाख करोड़** के पार, पर क्या प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतर पाएंगे?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Private Capex: निवेश का ऐलान **₹14.6 लाख करोड़** के पार, पर क्या प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतर पाएंगे?

भारत के प्राइवेट सेक्टर ने वित्त वर्ष **2027** की पहली तिमाही में **₹14.6 लाख करोड़** के निवेश का ऐलान किया है, जो नई परियोजनाओं का **90%** हिस्सा है। हालांकि, निवेशकों के लिए एक बड़ा 'रियलिटी चेक' यह है कि रद्द होने वाली परियोजनाओं की वैल्यू **600%** तक उछल गई है।

भारत के इन्वेस्टमेंट लैंडस्केप में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में प्राइवेट सेक्टर ने ₹14.6 लाख करोड़ के नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है, जो पिछले साल के मुकाबले 28% अधिक है। मजे की बात यह है कि इन निवेशों में से 80% घोषणाएं अकेले महाराष्ट्र से आई हैं।

ऐलान बनाम हकीकत (Execution Gap)

इन्वेस्टमेंट का आंकड़ा तो बड़ा दिख रहा है, लेकिन जमीन पर काम की रफ्तार धीमी है। फिलहाल चल रहे प्रोजेक्ट्स की वैल्यू साल-दर-साल केवल 5% बढ़कर ₹204 लाख करोड़ के आसपास है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि प्रोजेक्ट्स के पूरे होने की दर में 17% की गिरावट आई है। रद्द हुए प्रोजेक्ट्स में 600% का भारी उछाल आया है, जिसका मुख्य कारण तीन बड़े रेलवे कॉरिडोर का कैंसिल होना है, जिनमें तिरुवनंतपुरम-कासरगोड और पुणे-नासिक लाइनें भी शामिल हैं।

सरकारी खर्च और सेक्टर ट्रेंड्स

सरकारी खर्च निवेश चक्र को सहारा दे रहा है। जुलाई तक डिफेंस और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में 41% की बढ़ोतरी देखी गई है, और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSU) का बजट यूटिलाइजेशन 36% से बढ़कर 40% हो गया है। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर में भी 28% की ग्रोथ दर्ज की गई है।

पावर, डेटा सेंटर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर निवेश खींच रहे हैं। अब तक 22 गीगावाट की पावर कैपेसिटी जोड़ी गई है, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा 20 गीगावाट से ज्यादा है। Power Grid जैसी कंपनियां ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत कर रही हैं। हालांकि, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों के लिए माहौल सतर्क रहने वाला है, क्योंकि मिडिल ईस्ट के एक्सपोर्ट मार्केट में ऑर्डर्स अभी भी तनाव से पहले के स्तर पर नहीं पहुंचे हैं।

निवेशकों के लिए सलाह है कि सिर्फ अनाउंसमेंट पर न जाएं, बल्कि प्रोजेक्ट्स की एक्जीक्यूशन हिस्ट्री और कंपनियों की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ पर ज्यादा गौर करें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.