3P Investment Managers के Prashant Jain का मानना है कि AI से भारतीय इकॉनमी को कोई बड़ा खतरा नहीं है। वहीं, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, IT सेक्टर के लिए AI से ज्यादा बड़ी चुनौती Global Capability Centers (GCCs) का बढ़ता प्रभाव है।
3P Investment Managers के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर Prashant Jain ने साफ किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोई सिस्टमिक रिस्क नहीं है। उनके अनुसार, IT इंडस्ट्री में करीब 70 लाख लोग काम करते हैं, जो भारत के कुल वर्कफोर्स का एक छोटा हिस्सा है। इसलिए, यदि तकनीक से कोई बड़ा बदलाव आता भी है, तो उसका असर केवल कुछ शहरी इलाकों तक ही सीमित रहेगा, पूरी अर्थव्यवस्था पर नहीं।
GCCs का बढ़ता दबदबा
Morgan Stanley के एनालिस्ट्स का मानना है कि इस वक्त IT सेक्टर में AI से कहीं ज्यादा असर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का दिख रहा है। ये मल्टीनेशनल कंपनियों के इन-हाउस हब हैं, जो भारत में अपने सॉफ्टवेयर और डेटा ऑपरेशन खुद संभाल रहे हैं।
IT निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शेयरहोल्डर्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण ट्रेंड है। GCCs अक्सर ट्रेडिशनल IT कंपनियों के मुकाबले 3 से 5 गुना ज्यादा सैलरी पैकेज ऑफर कर रहे हैं, जिससे टैलेंट को अपनी ओर खींचना आसान हो गया है। इस प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय IT कंपनियों के लिए अपने मार्जिन को बनाए रखना और कर्मचारियों को रिटेन करना एक बड़ी चुनौती बन गई है।
फिलहाल के डेटा बताते हैं कि AI अभी नौकरियों को खत्म करने के बजाय प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का एक टूल बना हुआ है। IT कंपनियों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वे कैसे बढ़ते वेतन खर्च (Wage Inflation) और GCCs की बढ़ती चुनौती के बीच अपना प्रॉफिट बरकरार रखती हैं।
