केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने फार्मा कंपनियों से सरकारी स्कीमों का पूरा लाभ उठाने की अपील की है। वर्तमान में टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलने वाली फंड स्कीमों का इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है, जिसे बढ़ाकर कंपनियां जेनेरिक्स से हटकर इनोवेशन और रिसर्च की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।
सरकारी मदद का लाभ उठाने में सुस्ती
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने नई दिल्ली में आयोजित 'Bharat Health Global Expo 2026' में घरेलू फार्मा उद्योग को आईना दिखाया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार के पास एडवांस टेस्टिंग हार्डवेयर और लैब अपग्रेड के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है, लेकिन दुर्भाग्य से इंडस्ट्री की ओर से इसके लिए बहुत कम आवेदन आ रहे हैं। यह एक बड़ा अवसर है जिसे कंपनियां अभी भुना नहीं पा रही हैं।
जेनेरिक्स से हटकर 'वैल्यू चेन' पर नजर
भारत भले ही जेनेरिक दवाओं का ग्लोबल हब हो, लेकिन अब समय 'वैल्यू चेन' में ऊपर चढ़ने का है। सरकार चाहती है कि कंपनियां केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित न रहें, बल्कि क्लिनिकल ट्रायल्स, पेटेंटिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश करें। ग्लोबल रेगुलेटरी मानकों को अपनाने से कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट्स में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेंगी।
सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता जरूरी
मंत्री ने सप्लाई चेन की सुरक्षा पर भी जोर दिया। अभी भी फार्मा सेक्टर Active Pharmaceutical Ingredients (API) और Key Starting Materials के लिए बाहरी देशों पर निर्भर है। जियो-पॉलिटिकल हालातों को देखते हुए, यह निर्भरता एक बड़ा रिस्क है। लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना अब केवल लागत बचाने का नहीं, बल्कि बिजनेस को सुरक्षित रखने का जरिया है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह एक बड़े बदलाव की आहट है। जो कंपनियां R&D और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करेंगी, लंबी अवधि में उनके मार्जिन बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें शुरुआती कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) ज्यादा होगा और सफलता की अनिश्चितता भी बनी रहेगी। आने वाले समय में बाजार इस पर नजर रखेगा कि कौन सी कंपनियां सरकारी प्रोत्साहन का लाभ उठाकर अपने बिजनेस मॉडल को आधुनिक बनाती हैं।
