केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि अमेरिका के कड़े H-1B और वर्क वीजा नियमों से भारत का घरेलू टेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम और मजबूत होगा।
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने हाल ही में अमेरिका की बदलती आव्रजन नीतियों और H-1B व PERM वीजा पर लगी पाबंदियों पर अपनी राय रखी है। 9 अक्टूबर को ET स्टार्टअप अवार्ड्स में बोलते हुए उन्होंने इसे भारत के लिए एक चुनौती के बजाय बड़े अवसर के रूप में देखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि रिमोट वर्क कल्चर ने साबित कर दिया है कि भारतीय टैलेंट को घर बैठे ही बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकता है, जिससे अमेरिका में फिजिकल रिलोकेशन की निर्भरता कम हो रही है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का बढ़ता दौर
अब बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में मौजूद टैलेंट पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं। इससे बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और नोएडा जैसे शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का तेजी से विस्तार हो रहा है। ये सेंटर्स रिसर्च, डेवलपमेंट और एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज के लिए बड़े हब बन रहे हैं। कंपनियां वीजा की अस्थिरता से बचने के लिए अपनी ऑपरेशन्स को सीधे भारत से ही इंटीग्रेट कर रही हैं।
IT सेक्टर की बदली हुई रणनीति
भारतीय IT दिग्गज जैसे TCS, Infosys, Wipro और HCLTech की H-1B वीजा पर निर्भरता पहले ही काफी कम हो गई है। ये कंपनियां अब 'लोकल हायरिंग' के मॉडल पर काम कर रही हैं, जिससे क्लाइंट की जरूरतों को वहीं पूरा किया जा सके, जबकि बैकएंड का सारा काम भारत से हो रहा है। यह रणनीति उन्हें वीजा नियमों में हो रहे बदलावों से निपटने में मदद कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
लंबी अवधि में यह भारत के लिए पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की भी जरूरत है। अमेरिका में नए लेबर नियमों के कारण वहां कंप्लायंस और हायरिंग कॉस्ट बढ़ रही है, जिसका सीधा असर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन्स पर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि IT कंपनियां इन बढ़ती लागतों को कैसे मैनेज करती हैं।
