Piyush Goyal का बड़ा दांव: Bayer, Fresenius और Knauf के साथ भारत में मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Piyush Goyal का बड़ा दांव: Bayer, Fresenius और Knauf के साथ भारत में मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार

कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal ने वैश्विक दिग्गज कंपनियों Bayer, Fresenius और Knauf Group के लीडर्स के साथ अहम बैठक की है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और हेल्थकेयर तथा इंफ्रा सेक्टर में एक्सपोर्ट क्षमता को मजबूत करना है।

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर Piyush Goyal ने तीन ग्लोबल कॉर्पोरेट दिग्गजों—Bayer, Fresenius और Knauf Group के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ मुलाकात की है। सरकार का यह कदम अब पॉलिसी घोषणाओं से आगे बढ़कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों से ठोस ऑपरेशनल प्रतिबद्धताएं हासिल करने की ओर है, ताकि भारत की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

फार्मा R&D और हेल्थकेयर पर जोर

Bayer के फार्मा डिवीजन के साथ हुई चर्चा में भारत के हेल्थकेयर फ्रेमवर्क में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को एकीकृत करने पर फोकस रहा। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि भारत अब केवल साधारण मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू प्रोडक्शन की ओर बढ़ रहा है। कंपनी को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वह भारत की कुशल प्रतिभा और मैन्युफैक्चरिंग बेस का उपयोग ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए करे।

Fresenius Group के साथ बातचीत का केंद्र भारत में अफोर्डेबल मेडिकल सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग रही। सरकार का लक्ष्य है कि इन कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाकर स्थानीय मेडिकल सप्लाई चेन को इतना सशक्त बनाया जाए कि आयात पर निर्भरता कम हो सके।

सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग मटेरियल

हेल्थकेयर के अलावा, मंत्रालय ने कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर भी नजरें टिकाई हैं। Knauf Group, जो बिल्डिंग मैटेरियल्स के क्षेत्र में लीडर है, के साथ सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन प्रोडक्ट्स के लिए स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने पर बात हुई। भारत में तेजी से होते शहरीकरण के बीच, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ निर्माण सामग्री बनाने वाली कंपनियों को सरकार की ओर से मजबूत पॉलिसी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

ये बैठकें 'Make in India' के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक असर प्रोजेक्ट की टाइमलाइन, रेगुलेटरी अप्रूवल और रॉ मटेरियल की कीमतों पर निर्भर करेगा। हेल्थकेयर सेक्टर में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर सरकारी नियंत्रण (Price Control) के बीच, इन ग्लोबल कंपनियों की भारतीय रणनीति पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है। भविष्य में प्रोजेक्ट्स की शुरुआत और नई कैपेसिटी एडिशन पर आने वाले अपडेट्स ही इस पहल की सफलता तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.