वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के दौरान **$15 अरब** के 'सेमीकंडक्टर इंडिया मिशन 2.0' को प्रमोट किया है। सरकार का लक्ष्य 2032 तक घरेलू चिप बाजार को **$150 अरब** तक पहुंचाना है। इस दिशा में सर्टिफिकेशन नियमों में छूट पर भी विचार किया जा रहा है, जो निवेशकों के लिए बड़ी राहत हो सकती है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने चार दिवसीय जापान दौरे में वहां की बड़ी कंपनियों को भारत के सेमीकंडक्टर और AI इकोसिस्टम में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। इस दौरे का मुख्य केंद्र 'सेमीकंडक्टर इंडिया मिशन 2.0' रहा, जिसके लिए सरकार ने $15 अरब का बजट रखा है। सरकार का अनुमान है कि इससे कुल $50 अरब का निवेश आकर्षित होगा, जिससे 2032 तक $150 अरब की घरेलू मांग को पूरा किया जा सकेगा।
नियमों में ढील से मिलेगी रफ्तार
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर सरकारी नियमों के सरलीकरण से जुड़ी है। सरकार ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) सर्टिफिकेशन में उन हाई-टेक उपकरणों के लिए छूट देने पर विचार कर रही है, जो सेमीकंडक्टर और AI मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी हैं। अब तक सख्त सर्टिफिकेशन नियमों के कारण प्रोजेक्ट शुरू करने में देरी होती थी। नियमों में बदलाव से प्लानिंग से लेकर प्रोडक्शन तक का समय कम होगा।
फोकस के 6 मुख्य स्तंभ
यह मिशन चिप डिजाइन, मशीनरी, फैब्रिकेशन, असेंबली एंड टेस्टिंग (ATMP/OSAT), R&D और स्किल डेवलपमेंट पर केंद्रित है। जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग का लाभ उठाकर भारत अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहता है। इसके अलावा, 3,00,000 भारतीय पेशेवरों को जापान के वर्कफोर्स में शामिल करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम और मॉनिटरेबल
सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश के जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर है और रेवेन्यू शुरू होने में लंबा समय लगता है। भारत अभी भी विशेष गैसों और उपकरणों के लिए वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है, इसलिए ग्लोबल सप्लाई चेन में कोई भी बाधा प्रोजेक्ट टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती है। निवेशकों को अब BIS नियमों पर आने वाली स्पष्टता और फैब्रिकेशन पार्टनरशिप की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही तय करेगा कि यह सरकारी फंड जमीन पर कितनी तेजी से मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी में बदलता है।
