कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की अकाउंटिंग बॉडीज से Mutual Recognition Agreements को जल्द फाइनल करने की अपील की है। इससे दोनों देशों के बीच चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का आवागमन आसान होगा और CEPA समझौते को और मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर Piyush Goyal ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के अकाउंटिंग संस्थानों से एक-दूसरे की क्वालिफिकेशंस को मान्यता देने वाले समझौतों को रफ्तार देने का आह्वान किया है। ओशिनिया में Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) के एक कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का बिना किसी रुकावट के काम करना द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यह कदम दोनों देशों के बीच चल रहे Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को नई गति देने की दिशा में एक अहम प्रयास है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते पहले से ही काफी गहरे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में कुल द्विपक्षीय व्यापार $50.2 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया का भारत में इन्वेस्टमेंट स्टॉक $26.8 बिलियन है, जबकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया में $45.3 बिलियन का निवेश किया हुआ है। वर्तमान में, ऑडिट, टैक्स और कंसल्टिंग से जुड़ी बड़ी प्रोफेशनल फर्म्स को टैलेंट शेयरिंग या स्टैंडर्ड ऑपरेशंस में काफी कानूनी और रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
अगर ये दोनों देश Mutual Recognition Agreement तक पहुंच जाते हैं, तो इससे प्रोफेशनल फर्म्स के लिए क्रॉस-बॉर्डर काम करना न केवल सस्ता होगा, बल्कि इसमें लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा। इससे कंपनियों की कार्यकुशलता में सुधार होगा और सर्विसेज का इंटीग्रेशन तेजी से हो पाएगा।
मार्केट के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह अभी बातचीत के स्तर (negotiation phase) पर है। इन समझौतों का भविष्य पूरी तरह से CEPA वार्ता की प्रगति पर टिका है। सरकारें अपने स्थानीय प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स और लाइसेंसिंग नियमों को कितनी जल्दी एक-दूसरे के अनुकूल बनाती हैं, यही मार्केट के लिए सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर होगा। आने वाले महीनों में CEPA और प्रोफेशनल प्रोटोकॉल पर आने वाली आधिकारिक अपडेट्स पर सबकी नजरें रहेंगी।
