वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने नीदरलैंड में ASML, Nexperia और Ingka Group के प्रमुखों से मुलाकात की है। इस दौरे का मुख्य मकसद भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनाना है। हालांकि, निवेशकों को अब यूरोपीय देशों के नए कार्बन टैक्स नियमों पर नजर रखने की जरूरत है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर पर खास फोकस
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal की इन बैठकों में सबसे बड़ा जोर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर रहा। ASML और Nexperia जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ चर्चा का उद्देश्य भारत को केवल चिप डिजाइन तक सीमित न रखकर, एडवांस चिप मैन्युफैक्चरिंग में शामिल करना है। भारत सरकार पहले ही $10 बिलियन का सेमीकंडक्टर इंसेंटिव मिशन चला रही है, जिसे अब और गति देने की कोशिश की जा रही है।
रिटेल और ग्रीन एनर्जी में बड़े निवेश की उम्मीद
तकनीक के अलावा, IKEA की पैरेंट कंपनी Ingka Group के साथ रिटेल सोर्सिंग बढ़ाने पर बात हुई। वहीं, ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी पूंजी जुटाने पर भी जोर दिया गया। भारत का लक्ष्य एनर्जी सेक्टर में करीब $200 बिलियन का निवेश आकर्षित करना है, जो भविष्य के डेटा सेंटर्स और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी है।
ट्रेड पॉलिसी और कार्बन टैक्स की चुनौती
विकास की इस राह में कुछ regulatory बाधाएं भी हैं। मंत्री ने खुद माना कि कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) का बोझ कम करना जरूरी है। साथ ही, यूरोपीय संघ के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (Carbon Border Adjustment Mechanism) पर भी चिंता जताई गई है। यह एक तरह का कार्बन टैक्स है, जिससे भारत से यूरोप निर्यात होने वाले स्टील और अन्य सामानों की लागत बढ़ सकती है। निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किस तरह इन ट्रेड बैरियर्स को सुलझाती है और नई जॉइंट वेंचर्स की घोषणाएं कब शुरू होती हैं।
