कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव की चिंताओं को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने रक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत सामरिक तालमेल पर जोर दिया है। हालांकि ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है, लेकिन एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के लिए टैरिफ और ट्रेड सरप्लस के आंकड़े अब भी अहम हैं।
रिश्तों की नई धुरी: डिफेंस और टेक
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने साफ किया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते शॉर्ट-टर्म ट्रेड फ्रिक्शन से कहीं ऊपर हैं। उन्होंने बताया कि अब दोनों देशों के बीच गठबंधन के मुख्य स्तंभ क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस टेक्नोलॉजी और ह्यूमन कैपिटल बन गए हैं। सरकार का संदेश साफ है—भू-राजनीतिक (Geopolitical) और आर्थिक बॉन्ड पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
व्यापार समझौते का क्या है अपडेट?
बायलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर सरकार का रुख सतर्क और परिस्थितियों के अनुसार ढलने वाला है। फरवरी 2026 में समझौते का जो फ्रेमवर्क पेश किया गया था, उसे अब बदली हुई स्थितियों के हिसाब से एडजस्ट किया जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पहले संकेत दिए थे कि दोनों देश कॉम्प्लेक्स टैरिफ स्ट्रक्चर और मार्केट एक्सेस के मुद्दों पर एक 'लैंडिंग पॉइंट' की तलाश कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए डेटा की बारीकियां
आंकड़े बताते हैं कि 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में भारत का अमेरिका को एक्सपोर्ट मामूली 0.92% बढ़कर $87.3 बिलियन रहा, जबकि अमेरिका से इंपोर्ट 15.95% उछलकर $52.9 बिलियन पहुंच गया। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत का ट्रेड सरप्लस पिछले साल के $40.89 बिलियन से घटकर $34.4 बिलियन रह गया है। यह गिरावट एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के लिए संतुलन बनाने की जरूरत को दर्शाती है।
चुनौतियां और रिस्क फैक्टर्स
आगे की राह में कुछ चुनौतियां बरकरार हैं। अमेरिकी टैरिफ स्ट्रक्चर में बदलाव और रूस से ऊर्जा आयात जैसे बाहरी भू-राजनीतिक कारक अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, ट्रेड डील फाइनल न होने से टेक्सटाइल्स और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों के लिए मार्केट एक्सेस पर स्पष्टता की कमी बनी हुई है।
निवेशकों को अब दोनों देशों की सरकारों द्वारा ट्रेड टॉक्स और टैरिफ फ्रेमवर्क पर आने वाले अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसमें कोई भी अचानक बदलाव सीधे तौर पर अमेरिका पर निर्भर रहने वाली कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
