ग्लोबल कंपनी PepsiCo ने खर्चों पर लगाम लगाने के लिए वेट-लॉस दवाओं पर मिलने वाली हेल्थ इंश्योरेंस कवर को खत्म करने का फैसला किया है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर ने **2026** की दूसरी तिमाही में **24.6 मिलियन स्क्वायर फीट** की रिकॉर्ड लीजिंग के साथ नई ऊंचाई छू ली है।
PepsiCo का कॉस्ट कटिंग दांव
दिग्गज एफएमसीजी कंपनी PepsiCo ने अक्टूबर से अपने कर्मचारी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में वजन घटाने वाली दवाओं यानी GLP-1 मेडिकेशन्स का कवर हटा दिया है। इन दवाओं की बढ़ती मांग और इनकी ऊंची कीमतों के कारण कंपनी के मेडिकल खर्चों पर भारी बोझ पड़ रहा था। यह फैसला बताता है कि बड़ी कंपनियां अब अपने ऑपरेशनल ओवरहेड्स को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं। साथ ही, इन दवाओं के बढ़ते चलन से भविष्य में प्रोसेस्ड फूड की डिमांड पर पड़ने वाले असर पर भी नजर रखना जरूरी है।
भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट की तूफानी रफ्तार
एक तरफ वैश्विक स्तर पर लागत प्रबंधन की चिंताएं हैं, तो दूसरी तरफ भारत के रियल एस्टेट मार्केट में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में ग्रॉस ऑफिस लीजिंग 24.6 मिलियन स्क्वायर फीट के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछले क्वार्टर के मुकाबले 18% ज्यादा है और सालाना आधार पर 14% की बढ़ोतरी दर्शाता है।
CBRE South Asia की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत में काम करने वाली 75% कंपनियां 2028 तक अपने ऑफिस स्पेस को और बढ़ाना चाहती हैं। इसमें से 30% कंपनियों का लक्ष्य अपने पोर्टफोलियो को 30% से ज्यादा विस्तार देना है। हालांकि यह ग्रोथ सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि कंस्ट्रक्शन में देरी न हो और कुछ चुनिंदा बाजारों में सप्लाई ज्यादा न बढ़ जाए। रियल एस्टेट डेवलपर्स और REITs के लिए अब बेहतर रेंटल रेट्स हासिल करना सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर होगा।
