US टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्ट को झटका! पार्लियामेंट्री पैनल ने जताई चिंता

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
US टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्ट को झटका! पार्लियामेंट्री पैनल ने जताई चिंता

अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (Tariff), खासकर सेक्शन 301 (Section 301) के तहत, भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। एक नई पार्लियामेंट्री रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। कमेटी ने पाया है कि स्टील, केमिकल और हैंडीक्राफ्ट जैसे सेक्टर भारी दबाव झेल रहे हैं, जिससे उनकी ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस (competitiveness) पर असर पड़ रहा है।

एक्सपोर्ट पर अमेरिका का बढ़ता टैरिफ...

6 अगस्त, 2026 को पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन कॉमर्स ने भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर अपनी 200वीं रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि अमेरिकी टैरिफ उपाय द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को जटिल बना रहे हैं और भारतीय एक्सपोर्ट ग्रोथ के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं।

कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित?

रिपोर्ट में खास तौर पर सेक्शन 301 के तहत 10% से 12.5% तक के ड्यूटी वाले अमेरिकी टैरिफ एक्शन और मेटल पर पुराने सेक्शन 232 (Section 232) टैरिफ का जिक्र किया गया है। इनकी वजह से भारतीय बिजनेसेज के लिए अनिश्चितता बढ़ी है। कमेटी ने सीधे तौर पर स्टील, एल्युमीनियम, केमिकल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को दबाव में बताया है। इन सेक्टर्स के लिए ऊंचे टैरिफ का मतलब है मार्जिन पर प्रेशर, अगर कंपनियां ये लागत खरीदारों पर नहीं डाल पातीं या फिर कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले मार्केट शेयर खो देती हैं।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

निवेशकों के लिए यह रिपोर्ट उन कंपनियों के लिए जोखिम की ओर इशारा करती है जो फिजिकल गुड्स एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। एक्सपोर्ट वॉल्यूम में कमी या कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए दाम घटाने की जरूरत सीधे तौर पर इन सेक्टर्स के मैन्युफैक्चरर्स के रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल सकती है। साथ ही, कमेटी ने यह भी बताया कि कॉपर और एल्युमीनियम स्क्रैप जैसे रॉ मैटेरियल्स पर निर्भर भारतीय डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज को सप्लाई चेन में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है, अगर भविष्य में ट्रेड रिस्ट्रिक्शन्स को ठीक से मैनेज न किया जाए।

सर्विस सेक्टर में मजबूती

हालांकि, मर्चेंडाइज सेक्टर इन चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं भारत के सर्विस एक्सपोर्ट (Service Exports) की स्थिति काफी अच्छी है। 2024 में यह $98.52 बिलियन तक पहुंच गया। आईटी (IT) और बिजनेस सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में मजबूत ग्रोथ के साथ सर्विस ट्रेड द्विपक्षीय संबंधों का एक मजबूत पक्ष बना हुआ है। इससे ओवरऑल ट्रेड बैलेंस को कुछ स्थिरता मिलती है।

आगे क्या?

फिलहाल, भारत और अमेरिका एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) को फाइनल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। पार्लियामेंट्री पैनल ने सरकार से इस बातचीत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है ताकि एक लेवल प्लेइंग फील्ड सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, कृषि सेक्टर के लिए मजबूत सेफगार्ड मेजर्स (safeguard measures) लागू करने की भी सिफारिश की गई है।

निवेशकों के लिए आने वाले महीनों में इन ट्रेड नेगोशिएशन्स की प्रगति और टैरिफ मुद्दों को हल करने की उनकी क्षमता पर नजर रखना सबसे अहम होगा। एनालिस्ट्स (analysts) और निवेशक जेम्स (gems), ज्वेलरी (jewelry) और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में वॉल्यूम रिकवरी या लगातार दबाव के संकेतों के लिए मंथली एक्सपोर्ट डेटा पर भी नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.