संसद का मानसून सत्र **13 अगस्त, 2026** को अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद भी अभी तक औपचारिक रूप से 'प्रोरोग' (सत्र सत्रावसान) नहीं हुआ है। इस **29 दिन** की देरी पर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
केंद्र सरकार पर संसद के मानसून सत्र के औपचारिक सत्रावसान (Prorogation) में देरी को लेकर विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने निशाना साधा है। सत्र 13 अगस्त, 2026 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया था, लेकिन 29 दिन बीत जाने के बाद भी यह तकनीकी रूप से सक्रिय है। यह देरी सामान्य तौर पर लगने वाले 3 से 4 दिन के समय से कहीं ज्यादा है और इसने एक नया रिकॉर्ड बना दिया है।
क्या है प्रोरोगेशन का मतलब?
'स्थगन' (Adjournment) और 'सत्रावसान' (Prorogation) में बड़ा अंतर है। जहां स्थगन सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकता है, वहीं प्रोरोगेशन उस विधायी सत्र का औपचारिक अंत होता है।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया है कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में एक सोची-समझी रणनीति है। मकसद है परिसीमन (Delimitation) से जुड़े उस संवैधानिक संशोधन बिल को दोबारा पास कराना, जो 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में 298 वोटों के साथ दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया था (तब विपक्ष में 230 वोट पड़े थे)। विपक्षी दल का कहना है कि सत्र को सक्रिय रखकर सरकार सांसदों पर दबाव बना रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार और निवेशकों के नजरिए से, यह एक प्रशासनिक और विधायी मामला है। फिलहाल किसी भी कंपनी के फाइनेंशियल या मार्केट सेक्टर पर इसके सीधे असर का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि, बड़े निवेशक राजनीतिक स्थिरता को व्यापक आर्थिक माहौल के हिस्से के रूप में जरूर देखते हैं, लेकिन अभी यह केवल एक संसदीय प्रक्रियात्मक देरी है। अब बाजार की नजर राष्ट्रपति की तरफ से सत्र के आधिकारिक सत्रावसान की अधिसूचना पर टिकी है।
