Panagariya का बड़ा बयान: 1991 से कहीं ज़्यादा मुश्किल थीं Modi सरकार की ये Reforms!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Panagariya का बड़ा बयान: 1991 से कहीं ज़्यादा मुश्किल थीं Modi सरकार की ये Reforms!

16वें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद Panagariya ने कहा है कि GST और दिवालियापन संहिता (Bankruptcy Code) जैसे हालिया आर्थिक सुधारों को लागू करना 1991 के उदारीकरण से कहीं ज़्यादा राजनीतिक रूप से जटिल और कठिन था। उनका मानना है कि 1991 की बड़ी उदारीकरण नीतियों ने भले ही शुरुआत की, लेकिन लाइसेंसिंग नियंत्रण काफी हद तक बने रहे, जबकि मौजूदा बदलावों का मकसद कहीं गहरे ढांचागत बदलाव लाना है।

1991 के Reforms की असली कहानी?

16वें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद Panagariya ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि 1991 के आर्थिक सुधारों को लेकर जो आम धारणा है, वह अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जाती है। उन्होंने 1991 के उदारीकरण को महत्वपूर्ण तो माना, लेकिन उनका तर्क है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST), इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), और लेबर लॉ कॉन्सॉलिडेशन जैसे सुधारों को लागू करना राजनीतिक रूप से ज़्यादा चुनौतीपूर्ण और कठिन था।

Panagariya का यह नज़रिया इस आम धारणा को चुनौती देता है कि 1991 के सुधारों ने राज्य-नियंत्रित आर्थिक मॉडल को पूरी तरह खत्म कर दिया था। उन्होंने बताया कि सुधारों के काफी बाद भी करीब 850 प्रोडक्ट छोटे उद्योगों के लिए आरक्षित सूची में थे, जिसने उन सेक्टरों में बड़े पैमाने पर उत्पादन को रोका। इसके अलावा, शुरुआती उदारीकरण मुख्य रूप से इंटरमीडिएट इनपुट्स और कैपिटल गुड्स पर केंद्रित था, जबकि कंज्यूमर गुड्स पर सरकारी नियंत्रण कड़ा बना रहा। Panagariya के अनुसार, 1991 के उपाय प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण थे, लेकिन लाइसेंसिंग और रेगुलेटरी कंट्रोल का एक बड़ा हिस्सा बरकरार रहा।

हालिया ढांचागत सुधार क्यों माने जाते हैं ज़्यादा कठिन?

इसके विपरीत, Panagariya ने हाल की आर्थिक नीतियों को ढांचागत और राजनीतिक रूप से ज़्यादा चुनौतीपूर्ण बताया है। उन्होंने GST को एक विशेष रूप से कठिन सुधार करार दिया, जिसके लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन और केंद्र सरकार व विभिन्न राज्यों के बीच व्यापक सहयोग की आवश्यकता पड़ी।

इसी तरह, उन्होंने IBC को एक बड़ी उपलब्धि बताया। IBC से पहले, विफल व्यवसायों को निपटाने की प्रक्रिया अकुशल थी और इसमें अक्सर वर्षों लग जाते थे। एक आधुनिक दिवालियापन कानून बनाने की ज़रूरत दशकों पहले पहचानी गई थी, लेकिन इसे हाल ही में लागू किया गया। उन्होंने 29 लेबर कानूनों को चार सरलीकृत कोड में समेकित करने का भी ज़िक्र किया, जो कि एक महत्वपूर्ण ढांचागत बदलाव था और वर्षों से लंबित था। यह दिखाता है कि कार्यबल प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक जटिल राजनीतिक बातचीत प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ी।

निवेशक और आर्थिक संदर्भ

निवेशकों और बाज़ार पर नज़र रखने वालों के लिए, ये सुधार औपचारिकता और दक्षता की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। उदाहरण के लिए, IBC, लेनदारों को संपत्ति वसूलने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है, जो लंबी अवधि में बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है। GST ने एक एकल बाज़ार बनाने में मदद की है, जिससे अप्रत्यक्ष करों की जटिलता कम हुई है, जो पहले अंतर-राज्यीय व्यवसाय के लिए एक बाधा थी।

हालांकि, इस परिवर्तन में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अर्थशास्त्री अक्सर इन ढांचागत परिवर्तनों से जुड़े जोखिमों की निगरानी करते हैं। इनमें राज्य के बजट पर वित्तीय दबाव शामिल है, जहां बिना शर्त नकद हस्तांतरण जैसी योजनाएं सार्वजनिक वित्त को प्रभावित कर सकती हैं। नौकरशाही प्रतिरोध की चुनौती भी है, जिसे कभी-कभी एक 'पिछड़ी समाजवादी सोच' के रूप में वर्णित किया जाता है, जो इन नीतियों के पूर्ण लाभों को ज़मीनी स्तर तक पहुंचने में देरी कर सकती है।

इसके अलावा, जैसे-जैसे भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक गहराई से एकीकृत हो रहा है, घरेलू उद्योगों को बढ़ते प्रतिस्पर्धात्मक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। Panagariya ने पहले सुझाव दिया है कि भारत को अपनी वृद्धि बनाए रखने के लिए, व्यापार खुलापन और अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे भागीदारों के साथ नए समझौते महत्वपूर्ण हैं, भले ही इन उपायों के लिए घरेलू निर्माताओं को संभावित आयात प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए अधिक कुशल बनना पड़े।

आगे की राह

निवेशक और नीति निर्माता अब भारत के सुधार एजेंडे के अगले कदम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। केंद्र और राज्यों के बीच धन के बंटवारे को लेकर 16वें वित्त आयोग का काम एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिस पर नज़र रखनी होगी। इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण, न्यायपालिका और व्यापार नीति में और सुधार जारी हैं, क्योंकि सरकार देश की आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.