Arvind Panagariya: ग्लोबल झटकों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, एनर्जी और फूड सप्लाई पर बड़ा बयान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Arvind Panagariya: ग्लोबल झटकों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, एनर्जी और फूड सप्लाई पर बड़ा बयान

16वें फाइनेंस कमीशन के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि भारत ग्लोबल फूड और एनर्जी संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। मजबूत घरेलू कृषि उत्पादन और इंपोर्ट सोर्सेज में विविधता के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था ने अब तक हर बड़े झटके को झेला है। हालांकि, वित्त वर्ष **2027** की पहली तिमाही में **7.8%** की जीडीपी ग्रोथ के बावजूद, निवेशकों को वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी कीमतों पर नजर रखनी चाहिए।

पांचवें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बोलते हुए, 16वें फाइनेंस कमीशन के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने स्पष्ट किया कि भारत की सप्लाई चेन अब पहले से कहीं ज्यादा लचीली है। उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्ष के बावजूद, भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों से इंपोर्ट करने की रणनीति अपनाई है, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक ढाल का काम कर रही है।

इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार

भारत की विकास दर बाजार के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में यह ग्रोथ 7.3% के आसपास रह सकती है। यह रफ्तार दिखाती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू बाजार में दम बना हुआ है।

पनगढ़िया ने खास तौर पर कृषि क्षेत्र को 'शॉक एब्जॉर्बर' बताया है। जहां दुनिया के कई देश अनाज की कमी और महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी खाद्य और उर्वरक (Fertilizer) सप्लाई को सही तरीके से मैनेज किया है। यह स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा मौका भी पैदा कर रही है।

निवेशकों के लिए चेतावनी और रिस्क

सब कुछ ठीक होने के बावजूद, वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कुछ चुनौतियां निवेशकों की नींद उड़ा सकती हैं:

  • एनर्जी की कीमतें: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल को बढ़ा सकती हैं, जिससे ट्रेड डेफिसिट पर असर पड़ सकता है।
  • करेंसी में गिरावट: सितंबर 2026 तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 2.8% टूट चुका है, जिससे मैन्युफैक्चरर्स के लिए लागत बढ़ रही है।
  • FPI फ्लो: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का अस्थिर रुख बाजार में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बना हुआ है।

अगले कुछ महीनों में निवेशकों के लिए क्रूड ऑयल की चाल और कृषि क्षेत्र का एक्सपोर्ट वॉल्यूम सबसे महत्वपूर्ण 'मॉनिटरेबल' (monitorable) रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.